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घाघरा नदी के जलस्तर में घटाव के बाद भी देवारावासियों को नहीं मिली राहत

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मऊ के मधुबन में गजियापुर गाँव में टूटे रिंग बांध को बनाते मजदूर। अमर उजाला - फोटो : MAU
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दुबारी (मऊ)। लगातार दो दिन से घाघरा के जलस्तर में घटाव होने के बाद भी मधुबन तहसील क्षेत्र के देवारा इलाके के 20 से अधिक गांव टापू की शक्ल में हैं। ऐसे में गांव का आसपास के अन्य गांवों से संपर्क कट हुआ है। गांवों के संपर्क मार्गों पर भी पानी हिलोरे ले रहा। लोग जान जोखिम में डालकर किसी तरह आने जाने को विवश हैं। सैकड़ों एकड़ फसल डूब जाने से पशुओं के चारे के लिए परेशानी खड़ी हो गई है। कई दिनों से गांवों में जलजमाव होने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। इतना होते हुए भी न तो प्रशासन की तरफ से पर्याप्त नाव की व्यवस्था नहीं की जा सकी है। गांवों में रासायनिक दवाओं का छिड़काव तक नहीं किया जा सका है।
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घाघरा में उफान आने के चलते देवारा इलाके के लोगों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। नदी के उग्र तेवर देख लोग सशंकित हैं। मधुबन तहसील के हाहा नाला पर नदी के जलस्तर नजर डाला जाए तो परसिया जयराम गिरी हाहानाला रेगुलेटर पर नदी का जलस्तर 66.69मीटर रहा। जबकि बृहस्पतिवार को 66.78 मीटर रहा। जबकि खतरा बिंदु 66.31 मीटर रहा। नदी के जलस्तर में नदी के जलस्तर में घटाव के बाद भी मधुबन तहसील क्षेत्र के देवारा इलाके के चक्की मूसाडोही, भगत का पुरा, विनटोलिया, नई बस्ती, जरलहवा, बइरकंटा, विशुन का पुरा गांव सहित 20 से अधिक गांवों के लोगों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है।
गांव जाने वाले सभी संपर्क मार्ग डूब जाने से आसपास के गांवों से कट गए हैं। सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न होने से नष्ट होने के कगार पर है। पशुओं के चारे के लिए लोगों को जान जोखिम में डालकर आना जाना पड़ रहा है। अभी तक प्रशासन की तरफ से नाव की व्यवस्था तक नहीं की जा सकी है। कई दिनों से गांवों में जलजमाव होने से दुर्गंध उठ रही है। मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। लेकिन अभी तक रासायनिक दवाओं का छिड़काव तक नहीं किया जा सका है। उधर सिंचाई विभाग ने सभी बंधा का रिसाव बंद करा दिया है। परसिया जयराम गिरी बंधा पर निगरानी करने के लिए रात को जनरेटर की व्यवस्था दो दिनों से अनिश्चित समय के लिए कर दिया गया है। ग्रामीण भी रात को जागरण अभियान चला रहे हैं।
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