तीन दिन लगातार बढ़ते रहने के बाद घाघरा नदी का जलस्तर सोमवार को स्थिर हो गया। नदी खतरा बिंदु से 40 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। लेकिन मधुबन तहसील क्षेत्र के देवारा में नदी के जलस्तर में वृद्धि जारी है। इस क्षेत्र की सारी पिच सड़कें और खड़ंजे पानी में डूबे हुए हैं। शहर के पास नदी के किनारे स्थित सभी ऐतिहासिक धरोहरों को खतरा बरकरार है। नदी के लहरें किनारों पर सीधे टकरा रही हैं। मुक्तिधाम पर अधिक दबाव बना हुआ है।
रविवार को दिन और सोमवार को चार बजे शाम को गौरीशंकर घाट पर घाघरा का जलस्तर 70.30 मीटर रहा। इस तरह 24 घंटे से घाघरा का जलस्तर स्थिर है। गौरीशंकर घाट पर खतरे का निशान 69.90 मीटर है।
नदी अभी भी 40 सेमी ऊपर बह रही है। घाघरा का जलस्तर स्थिर होने के बाद भी नगर की सभी ऐतिहासिक धरोहरों पर खतरा बना हुआ है। लोगों को आशंका है कि नदी कभी भी रौद्र रूप धारण कर सकती है नदी का सर्वाधिक दबाव खाकी बाबा की कुटी से लेकर शवदाह घाट तक करीब 90 मीटर की दूरी तक बना हुआ है क्योकि यहीं पर नदी बैकरोलिंग हो रही है। घाघरा के तटवर्ती इलाके अभी भी पानी में डूबे हुए हैं। बंधों पर पानी का दबाव बना हुआ हैै।
उधर दुबारी से उत्तर देवारांचल में घाघरा जलस्तर में लगातार वृद्धि जारी है। इससे दर्जनों से अधिक गांव तथा पुरवे घाघरा के टापू बन गये हैं। चक्कीमुसाडोही, परसिया जयराम गिरि, चौहानपुर, गजियापुर, बरोहा, धर्मपुर भगत का पुरा, हरिलाल का पुरा, खैरा बिंदटोलिया, जरलहवा, शिशवा, नकिहवा, देवार टाड़ी, नईबस्ती आदि और पिच मार्ग तथा कचिया मार्ग समेत दर्जन भर सड़के पानी में डूब गई हैं। विद्यालयों के मार्ग डूबने से विद्यार्थी विद्यालय में जाने से वंचित हो रहें हैं। हजारों एकड़ लहराती फसलें पानी में डूबी हुई हैं।
उधर, अभी तक प्रशासन के तरफ से नाव की कोई व्यवस्था नही हो पायी है। इसके चलते पशुओं का चारा लाने का संकट पैदा हो गया है।
उधर परसिया हाहा नाला रेगुलेटर का मीटर रिडिंग 66.06 और खतरा का निशान 66.31 पर है। हालांकि हाहानाला पर खतरा बिंदु से नदी 25 सेंटीमीटर नीचे है।