बड़रावं ब्लाक के दो गांवों खत्रीपार और पीवाताल में सेहत से लेकर शिक्षा की तक हालत चिंतनीय है। इन गांवों को जिलाधिकारी ने ग्राम विकास योजना के तहत गोद लिया है।
सोमवार को उन्होेंने गांव का निरीक्षण किया। इस दौरान दस बच्चे कुपोषित पाए गए। छात्र देश के प्रधानमंत्री का नाम नहीं जानते। यहां तक कि 19 का पहाड़ा भी उन्हें नहीं रटाया गया है।
आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों का वजन करने वाली मशीन ही खराब मिली। जिलाधिकारी ने चिकित्सा अधीक्षक, बाल रोग विशेषज्ञ और बाल परियोजना अधिकारी का वेतन रोक दिया। सरकारी स्कूल के पांचों शिक्षकों को प्रतिकूल प्रविष्टि देने का निर्देश बीएसए को दिया।
घोसी और बोझी बाजार प्रतिनिधि के अनुसार जिलाधिकारी ने बड़रांव ब्लाक के पीवाताल और खत्रीपार गांवों को गोंद लिया है। ये दोनों गांव कुपोषित चिह्नित किए गए हैं।
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार डीएम 10.30 बजे पीवाताल गांव पहुंचे। उन्होंने पैदल घूमकर सभी छह आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण किया। गांव में सात कुपोषित बच्चे चिह्नित किए गए।
एक केंद्र पर बच्चों का वजन करने वाली मशीन खराब पाई गई। डीएम ने सीएचसी बड़रावं के चिकित्सा अधीक्षक डा. श्रवण कुामर, बाल रोग विशेषज्ञ डा. अनिल कुमार और सीडीओ रीता कुमारी का वेतन रोकने का निर्देश दिया।
इन तीनों से स्पष्टीकरण मांगने का निर्देश दिया। सीएचसी के निरीक्षण में वार्ड आया विंदा देवी और खंड विकास के सहायक लेखाकार राजेंद्र बहादुर अनुपस्थित थे। इसके बाद डीएम खत्रीपार गांव गए।
वहां तीन बच्चे कुपोषित पाए गए। जूनियर हाई स्कूल में आठवीं कक्षा के बच्चों से डीएम ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का नाम पूछा। एक भी छात्र सही उत्तर नहीं दे सका।
गणित के बहुत आसान प्रश्न भी छात्र नहीं हल कर सके, न ही 19 का पहाड़ा सुना सके। शिक्षा की दयनीय हात देख डीएम ने गणित शिक्षक दुखहरन सहित विद्यालय पर तैनात सभी पंाचों शिक्षकों को प्रतिकूल प्रविष्टि देने का निर्देश बीएसए को दिया।