अंबेडकरनगर में खेतों में ऐसे पड़ी गेहूं की कटी फसल।
- फोटो : अमर उजाला
गेहूं खरीद शुरू होने के आठ दिन बाद भी अधिकांश क्रय केंद्रों पर सन्नाटा है। कई क्रय केंद्रों पर बैनर पोस्टर तक नहीं लगाए गए हैं। अभी तक दो किसानों से 50 कुंतल की ही खरीद हो पाई है। हालांकि कटाई, मड़ाई कार्य चल रहा है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक लगभग 20 से 25 प्रतिशत ही मड़ाई हो पाई है। लेकिन जो किसान गेहूं बेंचना चाह रहे हैं, उन्हें क्रय केंद्रों का फायदा नहीं मिल रहा।
बार-बार मौसम में परिवर्तन का असर गेहूं के उत्पादन में देखने को मिल रहा है। उत्पादन में गिरावट आने से किसान के माथे पर चिंता की लकीरें देखी जा रही है। गेहूं के दाने हल्के हो गए हैं। कृषि विशेषज्ञ इसके लिए तेज हवाओं का चलना कारण बता रहे हैं। किसानों का फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए सरकार की ओर से गेेहूं खरीद योजना शुरू की गई है। एक अप्रैल से गेहूं खरीद करने का शासन की ओर से फरमान जारी किया गया था, लेकिन अधिकांश क्रय केंद्रों पर सन्नाटा पसरा रह रहा है। कई केंद्रों पर बैनर पोस्टर तक नहीं लग पाया है।
विभाग की ओर से जिले में 35 क्रय केंद्र बनाए गए हैं। विभाग की ओर से बनाए गए क्रय केंद्रों पर नजर डाली जाए तो विपणन के नौ, पीसीएफ के 18, कर्मचारी कल्याण निगम के पांच, एग्रो के एक तथा भारतीय खाद्य निगम के दो शामिल हैं। इस वर्ष खरीद लक्ष्य 35 हजार एमटी निर्धारित किया गया है। गत वर्ष जिले के गेहूं खरीद का लक्ष्य 19500 एमटी था।
गेहूं का समर्थन मूल्य 1525 रुपये रखा गया है। विभागीय आंकड़े के मुताबिक दो किसानों से 50 कुंतल ही खरीद हो पाई है। क्रय केंद्रों पर आने वाले किसानों को जोतबही दिखाना होगा। किसानों की मानें तो क्रय केंद्र खुल ही नहीं रहे हैं। इसका फायदा आढ़तिया उठा रहे हैं।\
वह किसानों की फसल को औने पौने दाम में खरीद रहे हैं। इस संबंध में कोपागंज क्षेत्र के किसान शिवाकांत सिंह, संजय सिंह, रविंद्र प्रसाद, जयनाथ शर्मा का कहना है कि गेहूं की फसल अच्छी थी बावजूद उत्पादन में 20 से 25 प्रतिशत की कमी आई है। अभी क्रय केंद्र भी सही ढंग से नहीं खुल पा रहे हैं। क्रय केंद्रों को नियमित खोलने की मांग की। इस बाबत जिला खाद्य विपणन अधिकारी नरेंद्र तिवारी का कहना है कि खरीद की जा रही है। निरीक्षण के दौरान कोई क्रय केंद्र बंद पाए जाने पर संबंधित क्रय केंद्र परे कड़ी कार्रवाई की जाएगी।