सीएचसी से 200 मीटर दूर अस्पताल में हुई सीजेरियन डिलीवरी
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोपागंज से महज 200 मीटर दूरी पर पीएस हेल्थ केयर सेंटर नाम से अस्पताल संचालित मिला। सीएचसी प्रभारी डॉ. इरशाद अहमद अपनी टीम के साथ बुधवार शाम सात बजे इस अस्पताल में पहुंचे। जांच के दौरान संचालक पंजीयन से संबंधित कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। वहीं जांच में यह भी सामने आया कि कांछीकला निवासी जमंतु की गर्भवती पत्नी का कुछ समय पहले सीजेरियन डिलीवरी कराई गई थी। इसके अलावा एक अन्य सीजेरियन डिलीवरी कराने की तैयारी में अस्पताल कर्मचारी जुटे हुए थे। सीएचसी अधीक्षक ने बताया कि डिलीवरी के लिए पहुंची महिला को सीएचसी में भर्ती कराया गया है। वहीं सीजेरियन डिलीवरी के दौरान प्रसूता को सीएचसी में भर्ती कर देखरेख की जा रही है।
अधिकारी बोले
अवैध अस्पताल और क्लीनिक के मामले में कार्रवाई की जा रही है। जांच कराई जा रही है। -डॉ. पंकज कुमार, सीएमओ
अस्पताल संचालकों का राजनीतिक संरक्षण
जिले में गर्भपात से जुड़े अस्पतालों और क्लीनिकों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है इसलिए प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। स्टिंग ऑपरेशन में जिन अस्पतालों के नाम सामने आए हैं उन्हें भी अलग-अलग राजनीतिक दल से जुड़े लोगों के संरक्षण प्राप्त हैं। लिहाजा, कार्रवाई किए जाने का दबाव बनाया जा रहा है। तीन अस्पताल ऐसे हैं जो सीएचसी के एक किलोमीटर के दायरे में हैं। रतनपुरा क्षेत्र में संचालित निजी अस्पताल को सत्ता पक्ष के एक नेता का संरक्षण प्राप्त है। कोपागंज के एक अस्पताल को कार्रवाई की जद से बाहर निकालने का प्रयास चल रहा है। इसमें सत्ता के साथ ही विपक्ष के नेता भी लगे हैं।
ये है मामला
वाराणसी में गर्भपात की दवा के सेवन से युवती की मौत के बाद हमारी टीम ने शुक्रवार से रविवार के बीच स्टिंग ऑपरेशन किया था। इससे पता चला था कि कोपागंज, अमिला, मादी सिपाह, थानादास और पुराघाट क्षेत्र में मेडिकल स्टोर की आड़ में गर्भपात का धंधा खुलेआम चल रहा है। पांच अस्पतालों/क्लीनिकों में डमी महिला मरीज को भेजकर जांच की गई जहां संचालकों ने दो से सात हजार रुपये में गर्भपात कराने की बात कही और भरोसा दिलाया कि कोई समस्या नहीं होगी। इन इलाकों में गर्भपात की दवा मेडिकल स्टोर पर सिरदर्द की गोली की तरह बेची जा रही है। न डॉक्टर का पर्चा लिया जाता है, न जांच रिपोर्ट और न ही अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट देखी जाती है।