दोहरीघाट/दुबारी। घाघरा नदी का जलस्तर स्थिर रहने के बाद भी नदी के रौद्र रुप धारण करने से तटवर्ती इलाकों के लोग दहशत में हैं। नदी की लहरें भारत माता मंदिर की दीवारों पर टकरा रही है। इसके चलते ऐतिहासिक धरोहरों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। वहीं मधुबन के क्षेत्र के बिंदटोलिया सहित देवारा क्षेत्र में कटान जारी रहने से लोगों को भूमिहीन होने की की चिंता सता रही है। इसके बाद भी आला अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। बुधवार को नदी का जलस्तर स्थिर रहा। गौरीशंकर घाट पर घाघरा का जलस्तर मंगलवार को 68.34 मीटर रहा। जबकि बुधवार को जलस्तर 68.34 मीटर ही रहा।
नदी का जलस्तर स्थिर रहने के बाद घाघरा की प्रलयंकारी लहरें भारत माता की दीवारों पर टकरा रही थी। इसके चलते मुक्तिधाम, भारत माता मंदिर, खाकी बाबा की कुटी, डीह बाबा मंदिर, हनुमान मंदिर, लोक निर्माण का डाक बंगला, शाही मस्जिद सहित विभिन्न ऐतिहासिक धरोहरों पर अस्तित्व का खतरा मंडराने लगा है। नदी के रौद्र रुप धारण करने से क्षेत्र के बहादुरपुर, रामपुर धनौली, नई बाजार, नवली, सरया, पतनई, ठाकुरगाव, गोधनी बीवीपुर ताहिरपुर, जमीरा चौराडीह, कोरौली, बेलौली, ठीकरहिया, रसूलपुर, सूरजपुर सहित तटवर्ती इलाकों के लोगों को नदी के कहर बरपाने की चिंता सताने लगी है।
मधुबन तहसील क्षेत्र के बिंदटोलिया मेें कटान जारी रहने से कटानपीड़ितों को बेघर तथा भूमिहीन होने की चिंता खाए जा रही है। कटान पीड़ितों का कहना था कि धर्मपर बिशुनपुर गांव के बिंदटोलिया पुरवे से घाघरा नदी लगभग पांच किमी दूर थी। प्रशासनिक उपेक्षा के चलते बिंदटोलिया गांव का अस्तित्व खतरे में है। कटान रोकना तो दूर कटान प्रोजेक्ट को अधूरा छोड़ दिया गया है।