मऊ। सिविल कोर्ट सेंट्रल बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल बृहस्पतिवार को बार एसोसिएशन के अध्यक्ष शमशुल हसन और महामंत्री हरिद्वार राय के नेतृत्व में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रतिंकर दिवाकर से मिला। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश ने बार एसोसिएशन के कार्यप्रणाली की सराहना की। कहा कि मऊ के बार एसोसिएशन की ख्याति बहुत ही सराहनीय है। न्यायमूर्तिगण मऊ बार एसोसिएशन की सराहना करते हैं। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल के पदाधिकारीगण को आश्वस्त किया कि जल्द ही वह मऊ पहुंचकर वहां की समस्याओं को दूर करेंगे। इस दौरान बार के पदाधिकारियों ने उन्हें अवगत कराया कि वर्तमान समय में सिविल जज जूनियर डिविजन के 8 न्यायिक अधिकारियों का स्थानांतरण हो गया है।
मात्र 4 न्यायिक अधिकारियों के आने की सूचना है। ऐसे में जिले में 19 अदालतें रिक्त हो गई हैं। यही नहीं विशेष न्यायाधीश एससी /एसटी की कोर्ट विगत 6 माह से रिक्त पड़ी है। कोर्ट में जमानत प्रार्थना पत्रों की सुनवाई नहीं हो पा रही है। जो लोग जेल में हैं उनके परिजन आए दिन कचहरी का चक्कर लगाते हैं।
बार के पदाधिकारियों ने चीफ जस्टिस को अवगत कराया कि जो आठ नई अदालतें बनी हैं, उनमें गर्मी में इतनी भीषण उमस होती हैं कि कार्य करना दुष्वार हो जाता है। ऐसे में एसी लगवाई जाए। मुख्य न्यायाधीश ने तत्काल कार्रवाई करने का आश्वासन देते हुए अपने पीपीएस को इस संबंध में रिपोर्ट मांगने के लिए कहा।
इस दौरान मुख्य न्यायाधीश ने बार के पदाधिकारियों को आश्वासन दिया कि जल्द ही उनकी खाली पड़ी अदालतों को भर दिया जाएगा। मुख्य न्यायमूर्ति ने पदाधिकारियों को प्रशासनिक न्यायाधीश न्यायमूर्ति गौतम चौधरी से मिलने के लिए कहा। जिसपर पदाधिकारी प्रशासनिक न्यायाधीश से मिलकर उन्हें अपना मांग पत्र सौंपते हुए रिक्त अदालतों को भरे जाने और अधिवक्ताओं के चेंबर के लिए 390 वर्ग मीटर की भूमि उपलब्ध कराए जाने की मांग की।
प्रशासनिक न्यायमूर्ति ने अपने पीएस को निर्देशित किया कि मांग पत्र में जिन बातों का उल्लेख किया गया है, उससे संबंधित कमेटी को रिपोर्ट के साथ उनके चेंबर में तलब किया जाए। प्रशासनिक न्यायमूर्ति ने कहा कि शीघ्र ही मऊ की सभी समस्याओं का निराकरण हो जाएगा। साथ ही उन्होंने जल्द ही मऊ आने का भी आश्वासन दिया।
प्रतिनिधिमंडल में बार के अध्यक्ष शमशुल हसन, महामंत्री हरिद्वार राय, जूनियर एडवोकेट्स एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री विनोद कुमार सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता नागेंद्र राय शामिल रहे।