अखिल भारतीय मध्याह्न भोजन रसोइया संघ के तत्वावधान में रसोइयों ने मानदेय न मिलने सहित विभिन्न मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट पर धरना प्रदर्शन किया। साथ ही जिलाधिकारी को संबोधित नगर मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा।
धरने को संबोधित करते हुए संगठन की मंडल अध्यक्ष संगीता देवी ने कहा कि मेहनत करने के बाद भी रसोइयों को मानदेय नहीं मिल रहा है।
मानदेय बकाया रहने से रसोइयों के सामने भुखमरी की नौबत आ गई है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी का हमेशा उदासीन रवैया रहता है। रसोइयों की ओर से बीएसए को दिया गया प्रार्थना पत्र कूड़े में डाल दिया जाता है।
आठ माह से मानदेय न मिलने से रसोइया होली सहित कई पर्व तक नहीं मना सके। अब नवरात्र, रामनवमी का भी पर्व मनाना मुश्किल लग रहा है। बकाया मानदेय का अविलंब भुगतान नहीं किया गया तो आंदोलन तेज करने को
बाध्य हो जाएंगेे। इसी क्रम में राजेश आर्य ने कहा कि जिले में छह हजार रसोइया कार्यरत हैं। रसोइए 11 माह एमडीएम बनाने का कार्य करते हैं। लेकिन मानदेय 10 माह का ही मिलता है।
वह भी पैसा समय से मिलता नहीं है। मध्याह्न भोजन योजना मेकं रसोइयों के पद पर हर वर्ष हो रही नियुक्ति को तत्काल बंद किया जाए। पूर्व से कार्यरत रसोइयों का ही नवीनीकरण किया जाए।
रसोइया नियुक्ति के शासनादेश में पाल्य अनिवार्यता समाप्त किया जाए। अंत में योजना को कई जनपदाें में स्वयंसेवी संस्था को दिए जाने से हजारों रसोइए भुखमरी के कगार पर आ गए हैं।
रसोइयों को समय से मानदेय देने सहित पांच सूत्री ज्ञापन जिलाधिकारी को संबोधित नगर मजिस्ट्रेट को सौंपा। धरने में गुड्डी शुक्ला, रावड़ी देवी, ऊषा देवी, हाजरा खातून, केवेंद्र सिंह, जगदीश प्रसाद सहित रसोइए शामिल थे।