संपन्नता और खुशहाली का प्रतीक प्रकाश पर्व दीपावली बुधवार को नगर सहित जिले के विभिन्न इलाकों में धूमधाम से मनाया जाएगा। पर्व की पूर्व संध्या पर देर शाम तक बाजारों में देर शाम तक गहमागहमी रही।
दीपावली का सामाजिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से अत्यधिक महत्व है। इसे दीपोत्सव भी कहा जाता है। बताया जाता है कि दीपावली के भगवान राम अपने चौदह वर्ष के वनवास के पश्चात अयोध्यावासियों ने घी के दीए जलाए थे।
कार्तिक मास की सघन काली अमावस्या की वह रात्रि दीयों की रोशनी से जगमगा उठी। इस मान्यता के तहत दीपावली का पर्व बुधवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। घरों में महिलाएं सुबह से ही घरों की सफाई में लगी रहीं।
बाजारों में लक्ष्मी गणेश मूर्तियों सहित विभिन्न सामानों के स्टालों पर खरीदारों की भारी भीड़ रही। इस संबंध में नगर के घास बाजार के ज्योतिषाचार्य पं. अजय शास्त्री ने बताया कि दीपावली के दिन दुर्लभ सिद्ध मुहूर्त होने के कारण अनुष्ठान मंत्र, यंत्र, पूजा व्रत, पूजा का महत्व कई गुना अधिक बढ़ जाता है।
इस दिन जीवन का प्रत्येक क्षण, प्रत्येक दिन सुखमय समृद्ध हो जाता है। यही नहीं इस दिन सौर मंडल में गोचर करने वाले ग्रहों का सभी राशियों के स्त्री, पुरुष पर गहरा प्रभाव भी पड़ता है।
अगर ग्रहों से संबंधित शुभ कार्य किए जाएं तो भले ही किसी ग्रह की राशि पर अशुभ प्रभाव भी क्यों न हो अनुकूल मंगलकारी शुभ परिणाम प्राप्त होंगे। बताया कि दीपावली पूजन स्थिर लग्न में करने से लक्ष्मी स्थिर रहती है। क्योंकि लक्ष्मी को चचला कहा गया है। स्थिर लग्न शुभ माना गया है।
प्रदोष काल में करने का निर्देश ग्रंथों में मिलता है। बताया कि शुभ चौघड़िया मुहुर्त बुुधवार को पूर्वाह्न 10.40 से 12.10 बजे, लाभ चौघड़िया शाम चार बजे से 5.26 बजे, प्रदोष काल 5.26 से रात 7.43 तक रहेगा। वृषभ लग्न शाम 5.47 बजे से रात 7.43 बजे तक, सिंह लग्न रात्रि 12.15 से 2.29 तक रहेगा। इस मुहूर्त मेें लक्ष्मी पूजन करना आर्थिक उन्नति के साथ-साथ सुख आरोग्य की प्राप्ति की जा सकती है।