फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मनीष की मौत के साथ ही बुझ गया घर का चिराग

विज्ञापन
विज्ञापन
मझवारा (मऊ)। घोसी कोतवाली क्षेत्र के ताहिरपुर मलेरीकोट पोखरे में प्रतिमा विसर्जन के दौरान डूबने से मरे दो किशोर आपस में गहरे मित्र थे। दोनों एक ही गांव के नहीं बल्कि एक ही कक्षा में थे। मनीष की मौत के साथ उसके घर का चिराग बुझ गया। क्योंकि वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान था।
विज्ञापन

घोसी कोतवाली क्षेत्र के लखनी मुबारकपुर ताहिरपुर मलेरीकोट गांव के लोगों ने धन वैभव और सुख की कामना कर दीपावली के अवसर पर मां लक्ष्मी की प्रतिमा को स्थापित किया था। लेकिन उन्हें क्या पता था कि मां का विसर्जन यात्रा इतनी खतनाक होगी, और गांव निवासी रामाशीष यादव के कुल का दीपक ही बुझ जाएगा। प्रतिमा विसर्जन के दौरान डूूबा किशोर मनीष अपने माता पिता की इकलौती संतान था। उसके पिता खेती किसानी कर बेटे मनीष को पढ़ा रहे थे, ताकि आगे चलकर वह उनकी बुढ़ापे की लाठी बनेगा। लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था।
मनीष के साथ डूबकर मरा निखिल यादव, आपस में गहरे मित्र ही नहीं थे, बल्कि दोनों सहपाठी भी थे। निखिल दो भाइयों में छोटा था, बड़ा भाई भी पढ़ता है। उसके पिता फतेह बहादुर यादव भी खेती किसानी करते है। सोमवार की शाम पांच बजे के करीब जैसे ही प्रतिमा विसर्जन में गए लोगों में कुछ किशोरों के डूबने की सूचना गांव तक पहुंची, गांव के लोग एक किमी की दूरी पल भर में तय कर मौके पर पहुंच गए। क्योंकि उस समय तक यह नहीं तय था, कि डूबने वाले किशोरों में कौन-कौन शामिल है।
विज्ञापन

सूचना थी कि मूर्ति प्रवाहित करने गए लोगों में कई पोखरी में डूब गए। इस दौरान सभी के मन में भय व्याप्त था, कि डूबने वाले किशोरों में कही उनके घर का चिराग तो नहीं न शामिल है। लेकिन मौके पर पहुंचने पर स्पष्ट हो गया कि पानी की गहराई में निखिल, मनीष के साथ आकाश है। इस पर लोगों ने तीनों को बचाने का पूरा प्रयास किया, लेकिन हुआ वही जो ईश्वर को मंजूर था। जिस साथी को बचाने के लिए मनीष और निखिल कूदे वह तो बच गया, लेकिन हालत गंभीर होने पर उसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जबकि दोनों दुनिया छोड़ चुके थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें