जिले में घरेलू गैस की ऑनलाइन बुकिंग के बाद भी उपभोक्ताओं को चार से पांच दिन तक सिलिंडर नहीं मिल पा रहा है। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद जिला पूर्ति विभाग ने इंडेन, एचपी और भारत गैस कंपनियों को एजेंसियों की व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए हैं।
उपभोक्ताओं का कहना है कि ओटीपी मिलने के बावजूद समय पर गैस की डिलीवरी नहीं हो रही है। शुक्रवार को नगर के बकवल स्थित इंडेन गैस एजेंसी के गोदाम पर लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली। इसके अलावा मधुबन, अदरी, नगर के शीतला माता मंदिर और घोसी में कतारें देखने कोे मिलीं
कई उपभोक्ताओं ने बताया कि बुकिंग के 48 घंटे तो दूर, 96 घंटे बीत जाने के बाद भी सिलिंडर घर तक नहीं पहुंचा। मजबूरी में लोगों को खाली सिलिंडर लेकर गोदाम पहुंचना पड़ा।
बकवल निवासी पदमा ने बताया कि उन्होंने 14 मार्च को गैस बुक कराई थी। उन्हें उम्मीद थी कि दो दिन के भीतर सिलिंडर मिल जाएगा, लेकिन छह दिन बीतने के बाद भी डिलीवरी नहीं हुई।
इसके बाद उन्होंने अपने बेटे मनीष को खाली सिलिंडर लेकर गोदाम भेजा, जहां वह सुबह 6 बजे से लाइन में लगने के बाद 11 बजे सिलिंडर जमा कर सका। उसे दोपहर बाद भरा सिलिंडर लेने के लिए दोबारा बुलाया गया।
अन्य उपभोक्ता मनोज ने बताया कि एलपीजी रिफिल बुक करने के बाद मोबाइल पर मैसेज और ओटीपी मिलने के बावजूद सिलिंडर नहीं मिल रहा है। शुक्रवार को बकवल के गोदाम पर सुबह 5 बजे से ही लोग लाइन में लग गए, ताकि उन्हें जल्दी नंबर मिल सके।
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व्यावसायिक सिलिंडर की किल्लत से बढ़ी परेशानी
घरेलू गैस की कमी से इनकार किया जा रहा है, लेकिन व्यावसायिक गैस की आपूर्ति बाधित है। इसका असर बाजार पर भी पड़ रहा है। कई दुकानदार घरेलू सिलिंडर का उपयोग करने को मजबूर हैं, जिससे खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ गए हैं। सिलिंडर की किल्लत के कारण काजू कतली के दाम में 80 से 100 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है, वहीं अन्य मिठाइयों के दाम भी बढ़े हैं। होटल और ढाबों में दाल-फ्राई व सब्जियों के दाम 15 से 20 रुपये तक बढ़ गए हैं। दुकानदारों का कहना है कि सिलिंडर की कमी के चलते उन्हें कोयला और लकड़ी का इस्तेमाल करना पड़ रहा है, जिससे लागत बढ़ गई है।
इमरजेंसी सेवाओं के लिए अलग व्यवस्था
जिला पूर्ति अधिकारी (डीएसओ) राघवेंद्र सिंह ने बताया कि अफवाहों के कारण गैस की मांग बढ़ गई है। पहले जिले की 30 गैस एजेंसियों द्वारा प्रतिदिन 6 से 6.5 हजार सिलिंडर की आपूर्ति होती थी, जो अब बढ़कर करीब 9 हजार हो गई है। उन्होंने बताया कि स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, जेल आदि की कैंटीन जैसी इमरजेंसी सेवाओं के लिए अलग से स्टॉक रखा गया है, जिससे इन सेवाओं पर कोई असर नहीं पड़ा है।
कालाबाजारी पर नजर, एजेंसियों को सख्त निर्देश
डीएसओ राघवेंद्र सिंह ने बताया कि घरेलू गैस की कालाबाजारी रोकने के लिए विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है। इसके लिए गैस एजेंसियों से भी सहयोग लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गैस आपूर्ति की नियमित समीक्षा की जा रही है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि उपभोक्ताओं को समय पर घर बैठे सिलिंडर की डिलीवरी मिले। सभी गैस एजेंसी संचालकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे उपभोक्ताओं की सुविधा को प्राथमिकता दें और उन्हें तय समय सीमा के भीतर गैस उपलब्ध कराएं। साथ ही एजेंसी संचालकों को अपने मोबाइल नंबर सक्रिय रखने और उपभोक्ताओं को संतोषजनक जवाब देने के निर्देश भी दिए गए हैं।