घोसी। आठ अवैध पिस्टलों के साथ मंगलवार को गिरफ्तार की गई कसबे के करीमुद्दीनपुर मुहल्ला निवासी असलहा तस्कर दानिश कुरैशी और निशात फातिमा के विरुद्ध स्थानीय कोतवाली में कोई मुकदमा दर्ज नहीं है। इस क्षेत्र में काफी दिनों से सक्रिय इन दोनों के बारे में मुकामी पुलिस को भनक तक नहीं थी। यह मुकामी पुलिस की सबसे बड़ी नाकामी है। स्थानीय कोतवाली पुलिस इनको पकड़ने अथवा असलहा बरामद करने में नाकाम रही। भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार घोसी नगर के करीमुद्दीनपुर के पूरब मोहल्ला निवासी दानिश कुरैशी पुत्र जैनुल आबिद व निशात फातिमा पत्नी स्व. शाहिद कई सालों से इस धंधे में लगे थे फिर भी कोतवाली पुलिस इनके बारे में अनभिज्ञ थी। गिरफ्तार महिला का पति शाहिद कई साल पहले कोपागंज, सदर कोतवाली, बलिया और आजमगढ़ पुलिस द्वारा अवैध असलहों के साथ गिरफ्तार किया जा चुका था। शाहिद ने बिहार के मुंगेर से असलहा तस्करी के लिये ही मुंगेर की निशात फातिमा से दूसरी शादी की थी। इसकी पहली पत्नी घोसी नगर से सटे गांव की है। हालांकि दानिश और निशात के साथ स्व. शाहिद का स्थानीय कोतवाली में कोई इतिहास नहीं है। पांच साल पूर्व मऊ से आई पुलिस ने असलहा के साथ एक व्यक्ति को गिरफ्त में लेकर जब कोतवाली के लिए चली तो कोतवाली घोसी के तत्कालीन उपनिरीक्षक की उदासीनता के चलते कुछ लोगों के उकसाने पर भीड़ ने पुलिस पर आक्रमण कर छुड़ा लिया। इसको लेकर कई पर गंभीर धाराओं में मुकदमा भी दर्ज हुआ परन्तु आरोपियों की पहुंच के आगे पुलिस शांत रही। सात वर्ष पूर्व भी नगर के करीमुद्दीनपुर से गोरखपुर पुलिस ने प्राचीन मूर्ति के साथ एक युवक को गिरफ्तार किया था। वह भी बुधवार को गिरफ्तार दानिश कुरैशी के पड़ोस का रहा। नगर के मझवारा मोड़ से पूर्व में आजमगढ़ पुलिस दो लोगों को प्रतिबंधित जानवरों के खाल, दाँत आदि के साथ गिरफ्तार किया था। आठ वर्ष पूर्व नगर के ही मधुबन रोड से एक दुकानदार को आजमगढ़ से आईं पुलिस गिरफ्तार कर ले गई थी। मजे की बात यह है कि स्थानीय पुलिस को अन्य थानों द्वारा जानकारी मांगे जाने पर हुई। परंतु किसी का न इतिहास दर्ज हुआ,न ही कोतवाली पुलिस ने किसी असलहा, मूर्ति तस्कर को गिरफ्तार किया। लोगों की मानें तो कोतवाली पुलिस के उपनिरीक्षक, सिपाही करीमुद्दीनपुर मुहल्ले और आस पास बराबर उठते बैठते रहते हैं, फिर भी इनको तस्करों के विषय में भनक न लग पाना लोगों को हजम नहीं हो पा रहा है।