पहसा में हुए भीषण हादसे में एक ही साथ चार मौतों से लोग सिहर उठे। जिला अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस पर दिन भर लोगों का हुजूम उमड़ा रहा। उधर, छात्र नेताओं के घरों पर मातम पसरा रहा। इन छात्र नेताओं में मृत उदय यादव की बहन की शादी पहली मई को तय है। बहन की डोली उठाने से पहले ही उदय की अर्थी उठ गई। उदय की मां और बहन का रो रोकर बुरा हाल हो गया। परिजनों को ढांढ़स बधाने घर पहुंचे लोग भी अपने आंसू नहीं रोक पा रहे थे।
रानीपुर के महासो गांव का निवासी अभिनेंद्र यादव आजमगढ़ में एक पालीटेकिभनक कालेज का छात्र था। वह आजमगढ़ में रहकर पढ़ाई करता था। घर वाले जान रहे थे कि वह आजमगढ़ में ही है। लेकिन हादसे में उसकी मौत की सूचना मिलने पर उसके परिवार वालों को पता चला कि वह मऊ में था। उसकी मौत से पिता राम सूरत, बड़े भाई अरविंद, आनंद और मां उर्मिला बेहाल रहे। उदय मर्यादा पुरुषोत्तम पीजी कालेज में बीए अंतिम वर्ष का छात्र था। वह उपाध्यक्ष पद का चुनाव लड़ चुका था। दो भाइयों में बड़ा था। इसकी मौत से पिता गुनुगुन, मां सुभावती और छोटे भाई गुलशन का रो रोकर बुरा हाल हो गया था। संदीप सिंह डीएलएड का छात्र था। संदीप की मौत से उसकी मां बहन और भाई अप्पू का रो रोकर बुरा हाल हो गया था। संदीप के पिता सीआरपीएफ में भोपाल में तैनात हैं। उन्हें सूचना दे दी गई। वे अपने घर के लिए चल दिए हैं। उधर रविकांत दो भाइयों में बड़ा था । उसकी मौत की सूचना जैसे ही उसके घसर पहुंची, उसकी मां सावित्री, भाई अनूप बिलख पड़े।
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मौत खिंचकर ले गई उदय को
मऊ। हलधरपुर थाने के पहसा गांव के पास सोमवार की रात हुई सड़क दुर्घटना में मृत उदय यादव को उसकी मौत खिंचकर दोस्तों के साथ ले गई। क्योंकि उदय का घर जमीन सैरुल्लाह गांव में था, जबकि रविकांत का घर उसके गांव के बाद पड़ता है। रात को उदय अपने गांव के पास इस लिए नहीं उतरा कि जब उसके साथी रविकांत को छोड़कर वापस लौटेंगे तो वह साथियों के साथ वापस आकर घर चला जाएगा। लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। चारों ने जीते जी ही नहीं मरने के बाद भी एक दूसरे का साथ नहीं छोड़ा।