फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दलित की हत्या के मामले में दो को आजीवन कारावास

विज्ञापन
विज्ञापन
विशेष न्यायाधीश एससी/ एसटी एक्ट बुद्धि सागर मिश्र ने दलित की हत्या के मामले में नामजद दो आरोपियों को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा के साथ ही कुल 15-15 हजार रुपया अर्थदंड निर्धारित किया। अर्थदंड न देने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
विज्ञापन

मामला मधुबन थाना क्षेत्र का है। मामले के अनुसार इब्राहिमपुरा दुबारी गांव निवासी गीता देवी पत्नी सुरेश की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज हुई। वादिनी का कथन है कि उसके पति सुरेश कुमार , हरिशंकर पांडेय के यहां राशन वितरण का कार्य करते थे। 11 मई 2016 को सुबह घर से वह हरिशंकर पांडेय के यहां राशन वितरण करने की बात कह कर गए। वापस न आने पर मां खोजते हुए गई। हरिशंकर पांडेय ने बताया कि मेरे यहां सुरेश नहीं आया था। इस दौरान बगल की दुकान में वादिनी की सास ने सुरेश का चप्पल ,गमछा और साइकिल देखा तो उन लोगों से सुरेश के बारे में पूछा तो आनाकानी करने लगे । आरोप है कि दुकान की छत पर सुरेश का शव बरामद हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सुरेश की मौत गला दबाकर की गई थी। वादिनी की तहरीर के आधार पर भवरूपुर गांव निवासी राम समुझ शर्मा पुत्र रामचंदर शर्मा और कपूर शर्मा पुत्र जगदेव को आरोपी बनाया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए विशेष लोक अभियोजक सत्येंद्र नाथ राय और एडीजीसी फौजदारी शिवदत्त यादव ने कुल सात गवाहों को पेश कर अपना पक्ष रखा। एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्को को सुनने के बाद रामसमुझ शर्मा और कपूर शर्मा को दलित की हत्या का दोषी पाया। दोषी पाए जाने के बाद दोनों को हत्या में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें