मऊ। जिले के नौ ब्लाकों पर बदइंतजामी के बीच पंचायत चुनाव की मतगणना रविवार को देर रात तक चली। कुछ ग्राम पंचायतों के प्रधानों के एक या दो मतों से विजयी होने पर प्रतिद्वंद्वियों ने आपत्ति कर फिर गणना कराई। घोसी में मतगणना के लिए लगाए गए टेबलों पर सोशल डिस्टेसिंग प्रभावित हो रही थी। जिससे अन्य कक्षों में गणना की व्यवस्था कराई गई। रतनपुरा में एक मतगणना पर्यवेक्षक की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें जिला अस्पताल भेजा गया। मतगणना केंद्रों पर कोविड प्रोटोकाल का पालन कराया गया लेकिन दो सौ मीटर दूरी पर प्रत्याशियों के समर्थकों की भीड़ लगी थी। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का उल्लंघन हुआ। बहुत से लोग मास्क नहीं पहने थे।
जनपद के नौ ब्लाकों के 668 ग्राम प्रधान, 34 जिला पंचायत सदस्य, 621 बीडीसी और लगभग आठ हजार ग्राम पंचायत सदस्य पदों की मतगणना ब्लाक मुख्यालयों के निकट कालेजों में की गई। मतों की गिनती की गति इतनी धीमी थी कि अपराह्न एक बजे तक परदहा ब्लाक के महज दो गांवों के प्रधानों के चुनाव परिणाम आ सके थे। शाम छह बजे तक एक भी जिला पंचायत सदस्य और बीडीसी प्रत्याशी का चुनाव परिणाम नहीं आ सका था। जिस गति से मतगणना चल रही थी उससे मतों की गिनती का कार्य देर रात अथवा पूरी रात तक चलने की संभावना जताई जा रही थी। कोपागंज ब्लाक के रेवरीडीह गांव के प्रधान केवल एक मत से जीती थी। वहां तीन बार गणना कराई गई। परदहा ब्लाक के अछार गांव में एक मतपेटिका के ही गायब होने की शिकायत प्रत्याशी ने किया। देर शाम तक उसका पता नहीं चल सका था। मतों की गणना में लगे कर्मचारियों की शिकायत थी कि उन्हें भोजन के नाम पर केवल दो दो सूखी घाठी दी गई। चाय और पानी की व्यवस्था नहीं की गई थी। अमिला, रानीपुर और घोसी सहित कई मतगणना केंद्रों पर मेडिकल टीम की व्यवस्था नहीं किए जाने की शिकायतें आईं। निर्वाचन अधिकारियों ने हालांकि मतगणना केद्रों से दो सौ मीटर की परिधि में लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था लेकिन बैरिकेडिंग के बाहर प्रत्याशियों के काफी समर्थकों की भीड लगी हुई थी। यह भीड़ कोविड गाइड लाइन के नियमों की धज्जियां उड़ा रही थी।