मऊ। कोरोना संक्रमण की काली छाया जिले की पहचान मऊवाली साड़ी के कारोबार पर सीधा पड़ा है। क्योंकि शुरुआती दिनों में लॉकडाउन, बाद में ज्यादा संख्या में कोरोना मरीजों के मिलने से पूरा बाजार बंद होना और वर्तमान में पांच दिनों से पूरी बाजार खुली तो ग्राहक नदारत है। ऐसे में साड़ी कारोबार प्रभावित होने से तमाम कारोबारियों के चेहरे की रौनक गायब हो गई है। बुनकरों के घरों के चुल्हे भी ठंडे पड़ने लगें थे। तमाम सामाजिक संगठनों की मदद से कई घरों में भोजन नसीब हुआ। कोरोना संक्रमण का असर यह है कि जिले का साड़ी कारोबार पहले तुलना में घटकर 50 प्रतिशत रह गया है। क्योंकि बाहर से डिमांड भी नहीं आ रही। ऐसे में तैयार माल गोदाम में तो अर्द्धनिर्मित बुनकरों के तानेबाने की शोभा बढ़ा रहें है।
जिले का प्रमुख साड़ी कारोबार पर कोरोना संक्रमण की काला छाया पड़ने से कारोबारियों की परेशानी बढ़ती ही जा रही है। जिले में निर्मित साड़ियां दक्षिण भारत के साथ कोलकत्ता, आदि स्थानों पर सप्लाई होती थी। कारोबारियों की मानें तो माल की डिमांड नहीं होने से माल डंप पड़ा है। कारोबारियों के अनुसार मार्च से जून में पूरे साल का 40 प्रतिशत कारोबार होता है। जबकि 60 प्रतिशत कारोबार आठ माह में होता है। लेकिन लाकडाउन के चलते मार्केट बंद रहने के चलते शादी सहित अन्य कार्यक्रम का समय बीत गया।
इसके चलते साड़ी कारोबार पर विपरीत असर पड़ रहा है। अब मार्केट तो खुलने लगा है, लेकिन सेलिंग नाम मात्र हो रही है। कोरोना से हर व्यक्ति का कामकाज प्रभावित होने के कारण लोगों की परचेजिंग पावर घटती जा रही है। कारोबारियों की मानें मार्च माह से ही कारोबार डावांडोल चल रहा है। हालत यह है कि हर किसी का कारोबार ठप होने के चलते लोगों की परचेजिंग पावर कम होती जा रही है। सेलिंग जहां प्रतिमाह एक लाख होती थी। अब न्यूनतम स्तर पर आ गई है। हालत यह है कि कारोबारियों की आर्थिक मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है।
न्यूनतम स्तर पर आ गई है सेलिंग
मऊ। साड़ी कारोबारी गिरधर अग्रवाल का कहना है कि मार्च माह से लगातार बंदी से सेलिंग घटती जा रही है। पांच माह पूर्व एक करोड़ का बिजनेस हुआ था। अब 15 लाख पर आ गया है। माल डंप पड़ा है। पार्टियों का चेक पड़ा है। बिजनेस डाउन होना समझ में नहीं आ रहा है।
इसी क्रम में साड़ी कारोबारी तथा अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष डॉ. रामगोपाल गुप्ता का कहना है कि कोरोना संक्रमण के चलते लगन आदि का समय बीत गया। सेलिंग नाम मात्र हो रही है।
गत वर्ष पांच माह की सेलिंग 20 लाख थी। अब वर्तमान पांच माह में सेलिंग एक लाख पर आ गई है। मार्केट खुल तो रहा है, लेकिन सन्नाटा की स्थिति रह रही है। साड़ी कारोबारी सुरेश कल्यानिया का कहना है कि मार्च माह से कोरोना संक्रमण के चलते मार्केट बंदी से साड़ी कारोबार पर पड़ा है। माल बाहर नहीं जा रहा है। सेलिंग नाम मात्र हो रही है। गत वर्ष के पांच माह में पांच लाख की सेलिंग होती थी।
अब वर्तमान पांच माह में 50 हजार पर पहुंच गई है। समझ में नहीं आ रहा है। साड़ी कारोबारी हाजी मुख्तार शिमला ने बताया कि कोरोना संक्रमण काल से पूर्व साड़ी का कारोबार लगभग चार से पांच करोड़ का हुआ था। लेकिन कोरोना संक्रमण के दरम्यान मार्च से अबतक सिर्फ पचास लाख का कारोबार हुआ है। इस तरह से अन्य कारोबारियों का कारोबा प्रभावित हुआ।