जिले में कोहरे का प्रकोप जारी रहने से आम लोगों की परेशानी बढ़ ही रही है।
वहीं ठंड और कोहरे से पशु पक्षी भी बेहाल हैं। बुधवार को दोपहर बाद तक
भगवान भास्कर ने दर्शन नहीं दिए।
प्रमुख बाजारों में भी चहल पहल कम ही रही।
कोहरे के कारण वाहनों का संचालन काफी कष्टदायक रहा और ट्रेनों की लेटलतीफी
भी जारी रहने से प्लेटफार्म पर यात्री ठिठुरते नजर आए। इसके बाद भी जिला
प्रशासन की ओर से सार्वजनिक स्थानों पर अलाव नहीं जलवाया जा सका है।
ठंड
का प्रकोप बढ़ने से जिले के विभिन्न इलाकों में पशु निमोनिया, बुखार,
सर्रा सहित विभिन्न रोगों से ग्रसित हो रहे हैं। इस संबंध में कृषि विज्ञान
केंद्र पिलखी के पशु वैज्ञानिक डॉ. विनय कुमार सिंह का कहना है कि ठंड बढ़
जाने से पशुपालकों को सतर्क रहने की जरूरत है।
ठंड से पशुओं में निमोनिया,
बुखार, सर्रा सहित विभिन्न बीमारी हो सकती है। पारा लुढ़कने के चलते पशुओं
को असुविधा होती है और वह ठंड लगने से तनाव में चला जाता है। पशुओं को
खुले आकाश में नहीं बांधना चाहिए। पशुओं के बीमार होने की स्थिति में पशु
चिकित्सक से तुरंत संपर्क करना चाहिए।
उधर कोहरा छाए रहने से लोगों के देर
से निकलने के चलते बाजारों में अपेक्षाकृत कम गहमागहमी रही। सुबह घने कोहरे
के चलते ट्यूशन पढ़ने वाले छात्रों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ा।
कोहरे के चलते भोर में चलने वाली रोडवेज बसों का संचालन प्रभावित होने से
महानगरों की ओर जाने वाले लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। ट्रेनों
के विलंब से चलने की वजह से प्लेटफार्म पर प्रतीक्षारत यात्रियों के लिए
एक-एक पल बिताना भारी पड़ रहा है।
घना कोहरा होने से बसों और ट्रेनों की
गति धीमी होने से लोग निर्धारित समय पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। ठंड बढ़
जाने के बाद भी प्रशासन द्वारा सभी सार्वजनिक स्थानों पर अलाव जलाने की अभी
तक कोई व्यवस्था न होने से गरीबों का जीना दूभर हो गया है।
सामाजिक स्तर
पर कार्य करने वाली स्वयंसेवी संस्थाएं भी उदासीन नजर आ रही हैं। ठंड के
खौफ से पटरी दुकानदार भी शाम पांच बजते ही दूकान समेटकर घरों की ओर रवाना
हो जा रहे हैं।