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Mau News: निमोनिया और कोल्ड डायरिया की चपेट में आ रहे बच्चे, पांच भर्ती

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सर्दी का असर बढ़ते ही बच्चों को निमोनिया और कोल्ड डायरिया अपनी चपेट में ले रहा है। जिला अस्पताल की बाल रोग विशेषज्ञों की ओपीडी में रोजाना 20-25 बच्चे निमोनिया और डायरिया से पीड़ित पहुंच रहे हैं।
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गंभीर हाल वाले छह बच्चों को वार्ड में भर्ती कर उपचार दिया जा रहा है। यह एक जिला अस्पताल का आंकड़ा है, जबकि मेडिकल कॉलेज में यह आंकड़ा 50 से अधिक बच्चों का हैं।
शनिवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में 956 मरीज पहुंचे, इसमें 150 से अधिक बच्चे थे, इसमें 20 से अधिक बच्चों में कोल्ड, निमोनिया, डायरिया की शिकायत लेकर पहुंचे थे।
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वहीं 25 फीसदी बच्चों ने तेज चल रही पसली, बुखार के साथ पेट में दर्द व उल्टी की भी परेशानी की शिकायत भी डाक्टरों के समक्ष रखा। डाक्टरों का मानना है कि पिछले 15 दिन में ओपीडी में डेढ़ गुना मरीज बढ़ गए हैं।
बालरोेग विशेषज्ञ डॉ. सीएस साहनी ने बताया कि सर्दी का मौसम बच्चों के लिए बेहद खतरनाक है। जरा-सी लापरवाही में बच्चे निमोनिया, कोल्ड डायरिया, सर्दी, जुकाम व बुखार की चपेट में आ आ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि निमोनिया सांस से जुड़ी बीमारी है। इसमें फेफड़ों में संक्रमण हो जाता, जिससे सूजन आ जाती है। कई बार पानी भी भर जाता है। पांच साल से छोटे बच्चों को इससे खतरा अधिक रहता है।
शुरुआत में बच्चों को सर्दी एवं खांसी की समस्या होती है। समय पर ध्यान नहीं देने पर बच्चे निमोनिया की गिरफ्त में आ जाते हैं।वर्तमान में पीआईसीयू में सात बच्चों का उपचार चल रहा है।
बीते दिसंबर माह में 150 से अधिक बच्चों को इसमें भर्ती कर उपचार किया गया था। वहीं नवंबर माह में भर्ती होने वाले बच्चों की संख्या 100 से कम रही थी। जबकि तीन दिन में अब तक 15 बच्चों को भर्ती कर उपचार किया जा चुका है।

धूप सेंकना बच्चों के लिए लाभदायक

महिला जिला अस्पताल की बाल रोग विशेषज्ञ कंचनलता ने बताया कि इस समय बच्चों के कमरे में तापमान का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। रात में बच्चों को कंबल व रजाई से ढक कर रखें। साथ ही सुबह की धूप से बच्चों को सेकें। वह लाभदायक है। नवजात शिशु को मां सीने से लगाकर कंगारू मदर केयर जरूर करें। जिससे बच्चे का शरीर गर्म बना रहे। सभी माताएं बच्चे को छह माह तक अपना ही दूध पिलाएं। बदलते मौसम में बच्चों का विशेष ध्यान दें लेकिन तापमान को मेटेंन करने के लिए अंगीठी जलाकर बंद कमरे में सोना, बच्चों को पूरी तरह से मोटे रजाई से ढक देना यह खतरनाक हो सकता है।
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बरतें ये सावधानी

. कीटाणुओं को फैलने से रोकने के लिए बच्चों के हाथ धुलवाते रहें।

. बच्चों की देखभाल के दौरान अपने हाथों की सफाई का भी ध्यान रखें।

. शिशु को छह माह तक सिर्फ स्तनपान ही कराएं।

. बच्चों का नियमित टीकाकरण कराएं।

. डॉक्टर की सलाह से भाप देना भी फायदेमंद रहता है।

. छह माह से अधिक उम्र के बच्चों को पौष्टिक आहार का कराएं सेवन।

. ठंड से बचाने के लिए गर्म कपड़े पहनाएं, बच्चों को घर से बाहर ने भेजें।
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