मऊ। डीसीएसके पीजी कॉलेज मऊ एवं हिंदुस्तानी एकेडमी प्रयागराज के संयुक्त तत्वावधान में नगर स्थित डीसीएसके पीजी कालेज के सभागार मेें रविवार को छायावाद का शताब्दी वर्ष 2020 एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि हिंदुस्तानी एकेडमी प्रयागराज के अध्यक्ष डॉ. उदय प्रताप सिंह रहे। मुख्य वक्ता इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर योगेंद्र प्रताप सिंह रहे।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ.अरविंद कुमार मिश्र ने हिंदी के वरिष्ठ गीतकार दयाशंकर तिवारी तथा भोजपुरी गीतकार डॉ. कमलेश कुमार राय को अंगवस्त्रम तथा स्मृति चिह्न प्रदान करसम्मानित किया।इस मौके परमुख्य अतिथि हिंदुस्तानी एकेडमी प्रयागराज के अध्यक्ष उदय प्रताप सिंह कहा कि चिन्मय भारत की अभिव्यक्ति हमें पूरे छायावादी काव्य में देखने को मिलती है। छायावादी काव्य जीवन का काव्य है। यह पलायन नहीं जीवन में कठिन परिश्रम संघर्ष और आगे बढ़ने की प्रेरणा देने वाला राष्ट्रवादी साहित्य है।
तुलसीदास कविता सेक्युलर वादियों के समक्ष चुनौती उत्पन्न करती है तुलसीदास कविता में भारतीय संस्कृति का आख्यान अभिव्यक्त हुआ है। मुख्य वक्ता प्रोफेसर योगेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि छायावाद सिर्फ काव्य का आंदोलन नहीं है अपितु इस काल के प्रमुख रचनाकारों ने महत्वपूर्ण गद्य साहित्य भी रचा है।
दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. राकेश सिंह ने कहा कि छायावाद का काव्य ऊर्जा का काव्य है। शक्ति का काव्य है और आम जनता को जगाने वाला काव्य है। प्रयागराज से आए डॉ. रमेश सिंह ने छायावाद के विभिन्न आयामों की चर्चा करते हुए छायावादी साहित्य का विस्तृत विश्लेषण किया।
गीतकार दयाशंकर तिवारी तथा भोजपुरी के गीतकार डॉ. कमलेश राय ने अपनी कविता के माध्यम से गोष्ठी को सरस बनाया।धन्यवाद ज्ञापन हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ कंचन राय ने किया। संगोष्ठी को डॉ. चंद्र प्रकाश राय, डॉ. शकील अहमद, डॉ. प्रदुम्न पासवान, डॉ प्रशांत पांडेय, डॉ. योगेंद्र नाथ चौबे, डॉ. तपस्या, डॉ. अखिलेश वर्मा, रवीश तिवारी, पंकज तिवारी, धीरज धर्मेंद्र आदि ने संबोधित किया।