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चौहान समाज के धरने को नहीं मिली अनुमति, जनवादी नेताओं को किया नजरबंद

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मऊ। चौहान समाज की तरफ से मंगलवार को कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित धरने को जिला प्रशासन ने अनुमति नहीं दी। पुलिस प्रशासन ने जनवादी पार्टी के प्रदेश सचिव सहित कार्यकर्ताओं को पूर्वाह्न छह बजे से ही उनके आवास पर जाकर पुलिस प्रशासन ने नजरबंद कर दिया। अपराह्न चार बजे छोड़ा गया। चौहान समाज की तरफ से मंगलवार को आयोजित धरने की अनुमति न मिलने से जनवादी पार्टी के पदाधिकारी तथा कार्यकर्ता आक्रोशित रहे।
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जनवादी पार्टी (सो) के प्रदेश सचिव राजकुमार चौहान ने जारी बयान में कहा कि जिला प्रशासन ने धरने की अनुमति न देकर यह साबित कर दिया है कि भगवाधारी गुंडों के खिलाफ भाजपा सरकार में कोई आवाज नहीं उठा सकता। हर उठने वाली आवाज को पुलिस के बल पर दमन किया जाएगा। पुलिस प्रशासन की तरफ से जनवादी पार्टी के प्रदेश सचिव सहित जिले के कार्यकर्ताओं को पुलिस ने नजरबंद कर दिया। जिन्हे देर शाम को छोड़ा गया। जिला प्रशासन की जितनी निंदा की जाए कम ही है। दूसरी तरफ प्रशासन के लाख प्रयास के बाद भी जितेंद्र चौहान सहित अन्य नेताओं के नेतृत्व में भारी संख्या में चौहान समाज के लोग बुनकर कालोनी पहुंचे। यहां एहतियातन पुलिस पहले से ही मौजूद थी। पुलिस ने आंदोलित समाज के लोगों को बुनकर कालोनी के मैैदान से बाहर नहीं निकलने दिया। वही उनकी बातों को सुनने के बाद ज्ञापन लेकर वापस लौटने को कहा। चौहान स्वाभिमान संघर्ष समिति के सदस्य और इस कार्यक्रम के आयोजक जितेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि जिला प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन में दो मांगों को रखा गया है, इसमें एक तो उनका गैंगेस्टर में चालान किया जाए। साथ ही उनके असलहे का लाइसेंस निरस्त किया जाए। दूसरी तरफ जनवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष राजकुमार चौहान ने कहा कि भाजपा सरकार में चौहान समाज पर हो रहे अत्याचार को जनवादी पार्टी अब सहन नहीं करेगी। प्रशासन के इस रवैये के खिलाफ बुधवार को जनवादी पार्टी के कार्यकर्ता राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपेगे।
इनसेट
नेताओं के जाने से नेतृत्व विहिन हो गए थे कार्यकर्ता
मऊ। जिला और पुलिस प्रशासन ने जितेंद्र सिंह चौहान सहित अन्य नेताओं की बातों को सुनने के बाद उनसे मांगों को ज्ञापन ले लिया। इसके बाद नेताओं को प्रेम पूर्वक जाने को कहा। नेताओं के जाने के बाद भी विभिन्न क्षेत्रों से चौहान समाज के लोगों के आने का सिलसिला जारी था। इसको लेकर पुलिस प्रशासन जहां हलाकान दिखा। वही आंदोलन में भाग लेने के लिए आने वाले समाज के लोग नेतृत्व विहिन हो गए। इस दौरान वो नारेबाजी आदि करने के बाद वापस लौट गए।
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