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Mau News: हिस्ट्रीशीटर सिपाही के विरुद्ध न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल, बर्खास्तगी की तैयारी

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हिस्ट्रीशीटर सिपाही गजेंद्र यादव- फाइल फोटो
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पुलिस ने हिस्ट्रीशीटर सिपाही गजेंद्र यादव को नौकरी से बर्खास्त करने की तैयारी शुरू कर दी है। न्यायिक हिरासत में जेल भेजे जाने के बाद पुलिस ने उसके विरुद्ध आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया है।
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आरोप है कि उसने दर्जनों लोगों से स्थानांतरण, पोस्टिंग और अन्य कार्य कराने का झांसा देकर करीब 20 लाख रुपये की ठगी की। गजेंद्र यादव ऑनलाइन जुआ खेलने का आदी बताया है। वह ठगी से जुटाए गए रुपयों को जुए में गंवा देता था।
एएसपी अनूप कुमार ने बताया कि वह अपने पद का दुरुपयोग कर लोगों का विश्वास जीतकर ठगी करता था। उसने अधिकांश लोगों से एक बार में एक लाख से 1.50 लाख रुपये तक लिए हैं।
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उसके विरुद्ध मऊ में चार, फिरोजाबाद में एक और हाथरस जिले में इस तरह के तीन मामले दर्ज हैं। गजेंद्र यादव वर्तमान में जेल में बंद है। इटावा जिले के जसवंतनगर थाना क्षेत्र के नगला नरिया निवासी गजेंद्र यादव की नियुक्ति वर्ष 2018 की सिपाही भर्ती में हुई थी।
वह 17 दिसंबर 2025 को हाथरस जनपद से स्थानांतरित होकर मऊ आया था। पूर्व में तैनाती वाले जनपदों में भी इसी प्रकार की शिकायतों के चलते उसका स्थानांतरण हो चुका है।
बीते दिसंबर में उसने लालच देकर पुलिस लाइन में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे सिपाही कौशलानंद पांडेय, धीरज गौड़, पुलिस लाइन में लगी लिफ्ट में कार्य करने वाले हेमंत पाल, महेश सिंह और अजीत पांडेय से 83 हजार रुपये ले लिए थे।
उसने मनमाफिक पोस्टिंग दिलाने का झांसा दिया था। धोखाधड़ी की जानकारी होने पर 22 दिसंबर 2025 को सभी ने पुलिस अधीक्षक को इसकी सूचना दी थी। इस मामले में सरायलखंसी थाने में गजेंद्र के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
अभी यह मामला निपटा भी नहीं था कि उसकी तैनाती घोसी तहसील में सुरक्षा गार्ड के रूप में कर दी गई। वहां भी उसने मजबूरियां बताकर पुलिसकर्मियों से उधार पैसे लिए।
सिपाही गजेंद्र यादव चार जून को सुबह 11:30 बजे कोपागंज स्थित निकिता जायसवाल के जनसेवा केंद्र पर पहुंचा और विश्वास में लेकर 1.30 लाख रुपये अलग-अलग तीन बैंक खातों में ट्रांसफर करा लिए। इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस ने छह जून को घोसी से उसे गिरफ्तार कर लिया था।
कोट-
सिपाही गजेंद्र यादव के विरुद्ध मऊ सहित कई जिलों में धोखाधड़ी के मामलों में प्राथमिकी दर्ज है। उसने पूर्व में भी पुलिसकर्मियों से उधार पैसे लिए और वापस नहीं किए। यह हिस्ट्रीशीटर आरक्षी है। इसे नौकरी से बर्खास्त करने के लिए कागजात तैयार किए जा रहे हैं। न्यायिक हिरासत में जेल भेजे जाने के बाद आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया गया है। -अनूप कुमार, एएसपी, मऊ
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