मऊ। हाईकोर्ट के आदेश पर शासन द्वारा 2015 के आधार पर जारी की जाने वाली नई गाइडलाइन के अनुसार आरक्षण करने पर पहले की आरक्षित की गई सीटों पर बदलाव हो सकता है। शासन की ओर से इस पर मंथन चल रहा है। 18 अथवा 19 मार्च तक शासन की ओर से 2015 के आधार पर आरक्षण को लेकर नई गाइड लाइन जारी होने की संभावना हैं।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर 1995 से आरक्षण की शुरुआत की गई। इसमें 1991 की जनगणना का आधार बनाया गया। इसके बाद 2000, वर्ष 2005, 2010 तक का आरक्षण 1991 की जनगणना के आधार पर हुआ , इसके बाद चक्रानुक्रम के अनुसार वर्ष 2015 में हुआ आरक्षण 2011 की जनगणना के आधार पर किया गया था। चूंकि कोरोना के चलते इस वर्ष जनगणना का कार्य नहीं हुुआ। लेकिन वर्तमान साल में भी आरक्षण 2011 की जनगणना के आधार पर किया गया था। जानकारों का मानना है कि साल 1995 के आधार जो आरक्षण किया गया लगभग वहीं 2015 में लागू किया गया था। अब जब साल 2015 के आधार पर आरक्षण किया जाने का आदेश हुआ है तो कुछ दिन पहले किया गया आरक्षण 2015 के अनुसार उससे मिलता जुलता ही होगा। हां, केवल जनसंख्या का ही अंतर होगा।
अवरोही चक्रानुक्रम के अनुसार आरक्षण में जनसंख्या के प्रतिशत का ध्यान रखा जाना है। ऐसा भी नहीं है कि 2015 में जिस गांव का जो आरक्षण था वही इस बार भी हो जाएगा। क्योंकि इसमें जनसंख्या को भी ध्यान में रखना है और जनसंख्या की भूमिका अहम होगी। मसलन अगर किसी गांव में अनुसूचति जन जाति के अवरोही क्रम में आरक्षण आता है लेकिन उस गांव में अनुसूचित जाति की जनसंख्या नहीं है तो वह गांव अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो जाएगा। बशर्ते उस गांव में अनुसूचित जाति की संख्या का प्रतिशत नियमानुसार है। यही प्रक्रिया अवरोही चक्रानुक्रम में अपनाई जानी है। वैसे वास्तविक तस्वीर तो शासन की नई गाइडलाइन आने पर ही स्पष्ट हो पाएगी। इस बाबत डीपीआरओ संजय मिश्र का कहना है कि शासन से नई गाइडलाइन आने पर स्पष्ट तौर पर कुछ कहा जा सकता है।