व्यवसायी की हत्या से लोगों में उबाल
चिरैयाकोट थाना क्षेत्र के खरिहानी मोड़ पर व्यवसायी विनोद सेठ की हत्या के बाद से अगले चार घंटे तक कानून व्यवस्था ध्वस्त हो गई। गुस्साए लोगों के आक्रोश का आलम यह रहा कि एक सरकारी बस को लोगों ने आग के हवाले कर दिया। एक अन्य बस को क्षतिग्रस्त कर दिया। पुलिस बूथ पर भी लोगों का गुस्सा उतरा, उसे ढहा दिया गया। पुलिस ने मामला नहीं सुलझा। आखिर पीएसी और आरएएफ को बुलाना पड़ा। चार की घंटे के बाद स्थिति नियंत्रण में आई।
विनोद सेठ की हत्या किए जाने से गुस्साए व्यापारियों ने अपनी दूकानें बंदकर जगह-जगह जाम लगा दिया। व्यापारियों एवं आम लोगों की अनियंत्रित भीड़ ने मुहम्मदाबाद गोहना की तरफ से आ रही एक रोडवेज बस के चालक राजाराम एवं यात्रियों को उतारकर उसमें आग लगा दी। इसके अलावा एक गाजीपुर रोडवेज की बस, एक प्राइवेट, एक ट्रक में भी तोड़फोड़ कर उसे क्षतिग्रस्त कर दी।
व्यापारी पिछले दस माह से बदमाशों द्वारा विनोद वर्मा को दी जा रही धमकी, उनके शो रूप पर फायरिंग के साथ ही गनर हटाए जाने से आक्रोशित थे। इसी को लेकर वह पुलिस प्रशासन पर अपनी खीज उतार रहे थे। चिरैयाकोट बाजार चौक पर तो रोडवेज बस में आग लगने के बाद लगा कि भीड़ थाने में घुस जाएगी और वहां भी कोई बड़ा घटना कर देेगी। लेकिन पुलिस ने आंसू गैस के गोले एवं रबड़ की गोलियां चलाकर किसी प्रकार स्थिति को नियंत्रित किया।
हालांकि भीड़ ने भी जमकर पथराव किया और अपना गुस्सा पुलिस प्रशासन पर उतारा। बाजार में हर कोई विनोद सेठ की हत्या को लेकर गुस्से में था। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले और रबड़ की गोलियां चलाईं तो भीड़ ने भी पथराव कर दिया। पुलिस और पब्लिक संघर्ष में आजमगढ़ से आ रहे 55 वर्षीय दशरथ निवासी मानपुर थाना चिरैयाकोट को भी गंभीर चोट आई जिसे बाद में पुलिस ने अस्पताल पहुंचवाया।
इस संघर्ष में कई पुलिसकर्मियों को भी मामूली रूप से चोट आई। सूचना मिलने के बाद मौके पर पुलिस अधीक्षक शिवहरि मीणा मय पीएसी एवं फोर्स के साथ पहुंचे। पुलिस ने भीड़ को खदेड़ना शुरू किया, इसके बाद भीड़ जाकर शांत हुई। मौके पर डीआईजी, जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव, मुख्य विकास अधिकारी ने घटना स्थल पर पहुंचकर जायजा लिया । पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में भी लिया।
विनोद सेठ के घर पर तो घटना के बाद मातम पसर गया था। उनके भाई विनय एवं पिता शरदचंद तो इस घटना से इस कदर विचलित थे कि अपनी सुधि बुधि ही खो दिए थे।