मऊ। कोरोना संक्रमण के चलते बाबा धाम जाने न जा पाने से जहां कांवरिया व्यथित हैं। वहीं कांवर यात्रा न निकलने से तैयारी करने, कपड़ा आदि का का स्टाक रखने वाले दुकानदारों को भी तगड़ा झटका लगा है। कांवर यात्रा न निकलने से ट्रांसपोर्ट के साथ-साथ कपड़ों की दुकान आदि भी प्रभावित हैं।
सावन माह शुरू होते ही नगर सहित जिले के विभिन्न इलाकों से भारी संख्या में कांवरियों के जत्थे की बाबाधाम के लिए रवानगी पूरे माह रहती है। इसके चलते शिव भक्तों के लिए विभिन्न सामग्रियों का एक बड़ा बाजार भी बन गया है। लेकिन इस वर्ष कोरोना संक्रमण के चलते न तो कांवर यात्रा निकल रही है और न ही बाबा धाम के लिए कांवरियों का जत्था रवाना हो रहा है। ऐसे में बाजारों में कांवर, कपड़ा, ट्रांसपोर्ट, पूजा-पाठ से जुड़ी सामग्री का कारोबार पर असर पड़ रहा है।
कारोबारियों की मानें तो बालोत्रा पापलीन गमछा, बाबा धाम वाला नारंगी रंग का गमछा, बारमूडा, नारंगी रंग की साड़ी की बिक्री ठप सी है। इस संबंध में अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष डॉ. रामगोपाल गुप्ता का कहना है कि कोरोना के चलते नगर में महीनों से दुकानें बंद चल रही है। कांवर यात्रा न निकलने से रेडिमेड, पूजन सामग्री आदि की बिक्री नाम मात्र हो रही है। करोड़ों का कारोबार प्रभावित हो रहा है। मधुबन कस्बा के कपड़ा कारोबारी शमशेर पाकिजा का कहना है कि सावन माह में अच्छी बिक्री होती है, लेकिन इस वर्ष कांवरयात्रा न निकलने से बिक्री ठप सी है।
कारोबारी महाप्रसाद का कहना है कि लंबे समय बाद ऐसी स्थिति देखने को मिल रहा है। कुछ समझ में नहीं आ रहा है। पिपरी क्षेत्र के कारोबारी गुड्डू देववंशी का कहना था कि कोरोना के चलते इस वर्ष बिक्री न के बराबर है। कारोबारी कुबेर मौर्य का कहना था कि कांवर यात्रा न निकलने से कपड़ा, पूजन सामग्री आदि की नाम मात्र बिक रही है।
वहीं डुमरी मर्यादपुर के कांवरिए अनिल वर्मा का कहना था कि 15 वर्ष से बाबा धाम जल चढ़ाने जा रहा हूं, लेकिन कोरोना के चलते रोक होने से मन व्यथित है। महुवी निवासी श्रद्धालु पंकज शर्मा का कहना था कि इस साल बाबा धाम नहीं जा पाऊंगा।
पिपरी क्षेत्र के गिरीश बरनवाल का कहना था कि इस वर्ष बाबा धाम न जा पाने से मन अशांत है। पिपरी क्षेत्र के ही आनंद मोदनवाल का कहना था कि बाबाधाम जाने के लिए सही समय का इंतजार कर रहा हूं।