मऊ। जिले में कोरोना संक्रमण से हर सेक्टर प्रभावित हुआ है। लेकिन सहलग और पर्वों के चलते परिवहन निगम के राजस्व में 40 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। इसके पीछे रेलवे का संचालन न होना है। हालात यह है कि कोरोना काल में रोडवेज डिपो से विभिन्न रूटों पर बसों का यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या भी 15 फीसदी बढ़ी है। दूसरी तरफ राजस्व में वृद्धि होने के बावजूद कई ऐसे रूट हैं जिन पर बसों के संचालन की सुविधा न के बराबर है। इसके अलावा डिपो पर न तो कोरोना संक्रमण से बचाव को लेकर सामाजिक दूरी का पालन नहीं किया जा रहा है।
वर्तमान में रोडवेज डिपो से रोजान 5500 से ज्यादा यात्री डिपो की 40 बसों के अलावा दूसरे डिपो से आनी वाली बसों से विभिन्न रूटों पर यात्रा कर रहे हैं। इससे रोडवेज डिपो को प्रतिदिन करीब सात लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हो रहा है। कोरोना संक्रमण काल से पहले होने वाले रोजाना पांच लाख रुपये राजस्व से 40 फीसदी अधिक है। रोडवेज का यह आय में ओर बढ़ोत्तरी हो सकती है, अगर गाजीपुर, गोरखपुर रूटों पर बसों का संचालन ओर बढ़ाया जाए।
वर्तमान में गाजीपुर रूट पर मऊ डिपो की एक बस का संचालन न होने से इस रूट के यात्रियों को या तो दूसरे डिपो की बसों का इंतजार करना होता या दूसरे वाहनों से जाना पड़ता है। वहीं गोरखपुर रूट पर केवल 4 बसों का संचालन हो रहा है, जबकि इस रूट पर अकेले 15 सौं से ज्यादा यात्री है। बीते मार्च माह से रेलवे के अधिकांश ट्रेनों का संचालन बंद होने से गोरखपुर, बलिया, गाजीपुर, आजमगढ़ रूट पर यात्रियों की संख्या में तीन गुनी वृद्धि हुई है। लेकिन गाजीपुर रूट पर परमिट नहीं होने से इस रूट पर जहां एक भी बस का संचालन नहीं है। आजमगढ़, गोरखपुर, बलिया रूट पर पांच से कम बसों का संचालन हो रहा है।