मऊ। तीन करोड़ की लागत से बनी जिला अस्पताल की बर्न यूनिट नौ वर्ष बाद भी विशेषज्ञ चिकित्सक के अभाव में शुरू नहीं हो सकी है। करोड़ों की लागत से बना भवन बेकार पड़ा है। जिला के अस्पताल के छोटे से कमरे में जलने के मरीजों का उपचार किया जा रहा है। झुलसने के गंभीर मरीजों का प्राथमिक उपचार कर उन्हें वाराणसी रेफर किया जा रहा है। संसाधन न होने से मंगलवार को छह बेड का वार्ड खाली रहा। मानव संसाधन न होने से भवन शो पीस बनकर रह गया है। विभाग की तरफ वर्षों से सिर्फ कागजी कार्रवाई चल रही है। जिला अस्पताल में वर्ष 2016 में तीन करोड़ की लागत से 25 बेड के बने बर्न यूनिट का निर्माण कराया गया था। लेकिन पिछले नौ वर्षों से विशेषज्ञ चिकित्सकों और स्टॉफ की तैनाती न होने के कारण यूनिट का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। यूनिट को शुरू करने के लिए प्लास्टिक सर्जन, दो जनरल सर्जन, तीन ईएमओ, छह स्टाफ नर्स, तीन ड्रेसर, छह मल्टी टास्क वर्कर की आवश्यकता है। कोविड काल में आजमगढ़ से चिकित्सक काे संबंद्ध किया गया था। कोरोना काल में इसे टीकाकरण केंद्र बनाया गया था। इस समय भवन में ताला बंद है। मानव संसाधन न होने से करोड़ों की लागत से बना भवन शो पीस बनकर रह गया है। हालत यह है कि मरीजों के इलाज के लिए जिला अस्पताल के कमरे में छह बेड लगाए गए हैं। मामूली रूप से जले हुए लोगों को भी अलग से कहीं रखने का इंतजाम नहीं है। चिकित्सकों की मानें तो आग में जले लोगों में तेजी से संक्रमण फैलता है, लेकिन इस हकीकत के बाद भी आला अधिकारी सब कुछ ठीक ठाक बता रहे हैं।
कोट
जिला अस्पताल में बर्न यूनिट बनाया गया है। बर्न यूनिट में विशेषज्ञ डाक्टर्स और स्टॉफ की तैनाती के मामले में शासन को पत्र भेजा गया है।
डॉ. धनंजय कुमार, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक,जिला अस्पताल