मुहम्मदाबाद गोहना तहसील परिसर प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है। यहां जलभराव, अधिवक्ताओं और वादकारियों की समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।
मामूली बरसात में ही पूरे परिसर में पानी भर जाता है, जिससे वादकारियों, अधिवक्ताओं और कर्मचारियों का आवागमन मुश्किल हो जाता है। परिसर में पहले से निर्मित एक पुराने भवन में उप जिला मजिस्ट्रेट न्यायिक का न्यायालय संचालित है।
यह भवन भी जर्जर हो चुका है और बरसात में छत टपकती है। महत्वपूर्ण फाइलों और अभिलेखों के भीगने का खतरा हर समय बना रहता है। इसी परिसर में राजस्व कर्मियों के लिए बने आवास भी जर्जर हैं।
इनकी मरम्मत को लेकर लंबे समय से आवाज उठाई जा रही है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। मजबूरी में यहां रह रहे कर्मचारी अपने खर्चे से छत और फर्श की मरम्मत कराकर रह रहे हैं।
सबसे हैरानी की बात यह है कि तहसील स्तर के आला अधिकारी उप जिलाधिकारी और पुलिस क्षेत्राधिकारी का आवास भी इसी परिसर में है। इसके बावजूद जलभराव और जर्जर भवनों की समस्या का निराकरण नहीं हो रहा है।
अधिवक्ताओं की परेशानी और भी ज्यादा है। उनके लिए परिसर का शौचालय इतना गंदा और जर्जर है कि आदमी तो क्या, उसमें जानवर भी जाना पसंद न करें। अधिवक्ताओं के लिए परिसर में अलग से यूरिनल की भी व्यवस्था नहीं है।
अधिवक्ता चेंबर के पास न तो कोई इंडिया मार्क हैंडपंप है और न ही पीने के साफ पानी की व्यवस्था। कई साल पहले नगर पंचायत द्वारा मुख्य तहसील भवन में एक कूलर फिल्टर लगाया गया है। मरम्मत न होने से अब उसका पानी भी पीने लायक नहीं रहा।
अधिवक्ता संगठन के मंत्री विनोद सिंह, अधिवक्ता महेंद्र राय, संगठन के पूर्व अध्यक्ष अली अकरम, खालिद जमाल, प्रदीप पांडे आदि का कहना है कि तहसील परिसर में जल निकासी की व्यवस्था, जर्जर भवनों की मरम्मत, शौचालय, पेयजल की मूलभूत सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराई जाएं।
अधिवक्ताओं का कहना है कि जब तक परिसर की दशा नहीं सुधरेगी, तब तक आमजन को न्याय और सम्मान दोनों नहीं मिल पाएगा। मुहम्मदाबाद गोहना उप जिलाधिकारी अर्चना अग्निहोत्री का कहना है कि समस्या का समाधान कराया जाएगा।