मऊ। नए सड़क दुर्घटना कानून के विरोध में नए साल के पहले दिन रोडवेज बसों के चालक हड़ताल पर चले गए। इससे 80 प्रतिशत रोडवेज बसों का संचालन नहीं हो सका। बसों का संचालन नहीं होने से बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए यात्रियों को गंतव्य तक जाने के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। दोपहर बाद 20 प्रतिशत बसाें का संचालन होने के बाद भी लोगों को तमाम समस्याओं से जूझना पड़ा। बिना नोटिस के हड़ताल पर गए चालकों पर तलवार लटक सकती है।
मऊ तथा दोहरीघाट डिपो में 84 रोडवेज बसों का संचालन होता है। नए कानून के विरोध में सोमवार को रोडवेज चालकों ने हड़ताल की। मऊ डिपो तथा दोहरीघाट डिपो से 80 प्रतिशत रोडवेज बसों के न चलने से सोमवार सुबह अपने गंतव्य को जाने के लिए रोडवेज पहुंचे यात्रियों को परेशान होना पड़ा। शाम के समय गैर जनपदों सहित विभिन्न रुटों पर गई बसें सोमवार को चालक लेकर नहीं लौटे। इससे शीतलहर के मौसम में यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। चालकों ने प्रदर्शन कर नए कानून का विरोध किया। नए कानून में सड़क हादसा होने पर आरोपी वाहन चालक को 10 साल की सजा और पांच लाख रुपये का जुर्माने का प्राविधान है। चालक नए कानून का विरोध कर रहे थे। चालकों का कहना था कि वह रोजाना करीब 400 रुपये कमाते हैं। यदि हादसे में इस तरह से जुर्माना और सजा होगी तो परिवार भुखमरी के कगार पर आ जाएगा। जुर्माने की राशि कहां से देंगे। इसलिए ऐसा कानून न लाया जाए। सरकार ने जो कानून बनाया है, उनमें दुर्घटना होने पर 10 साल की सजा और पांच लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है। पांच लाख रुपये हम कहां से देंगे। सरकार इस कानून को वापस ले। जब तक सरकार कानून वापस नहीं लेगी। तब तक हम हड़ताल पर रहेंगे।
चालक बिना नोटिस दिए हड़ताल पर चले गए। इससे रोडवेज बसों के संचालन पर असर पड़ा। विभागीय दिशा निर्देश मिलने पर चालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
हरिशंकर पांडेय, एआरएम, मऊ