सर्दी के दिनों में भी मरीजों के लिए किसी प्रकार की व्यवस्था नहीं की गई। वार्डों में कंबल तक मुहैया नहीं कराया जा सका है। जिला अस्पताल में 28 चिकित्सक के सापेक्ष 17 की है तैनाती है।
जबकि राजकीय महिला चिकित्सालय में 10 चिकित्सकों के सापेक्ष दो की ही तैनाती है। हालत यह है कि ओपीडी में चिकित्सकों के नदारद रहने से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से आने वाले रेफर मरीजों को बिन इलाज ही लौटना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में 28 चिकित्सकों की तैनाती है। ओपीडी कक्ष में चिकित्सकों के निर्धारित समय तक न बैठने से दूर दराज से आने वाले मरीजों का इलाज नहीं हो पाता।
जिला अस्पताल में बने ओपीडी कक्ष खुले रहते हैं, लेकिन अवकाश पर रहने वाले चिकित्सक की सूचना चस्पा नहीं की जाती है। दवाओं का अस्पताल में हमेशा टोटा रहता है। अस्पताल में गंदगी का अंबार है।
कहने को भीषण ठंड मेें भर्ती मरीजों को दो कंबल देने का सीएमएस ने दावा किया है, लेकिन इमरजेंसी तथा वार्डो में भर्ती मरीजों को अपना ही व्यवस्था करना पड़ रहा है।
यही हाल राजकीय महिला चिकित्सालय का है। कहने को तो जिला मुख्यालय स्थित राजकीय महिला चिकित्सालय 30 बेड का है, लेकिन यहां पर सुविधा शून्य है। यहां 10 विशेषज्ञ चिकित्सकों के सापेक्ष सीएमएस सहित एक चिकित्सक के भरोसे काम चलाया जा रहा है।
बाल रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति न होने से नवजात शिशुओं के इलाज में तमाम व्यवहारिक दिक्कतें आ रही हैं। अस्पताल बनने के वर्षो बाद भी अल्ट्रासाउंड तथा एक्सरे तथा पैथालोजी तक नहीं है। हालत यह है कि प्रसव के लिए भर्ती महिलाओं को जिला अस्पताल रेफर कर किसी तरह से काम चलाया जा रहा है।