पात्र गृहस्थी लाभार्थियों के यूनिट का अनाज कोटेदार उठान तो कर रहे हैं, लेकिन कुछ लाभार्थियों में इसका वितरण कर बाकी का अनाज कालाबाजार में बेच दिया जा रहा है। लेकिन प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है। कुछ ऐसा ही मामला बुधवार को फतहपुर मंडाव ब्लॉक क्षेत्र के दुबारी गांव में देखने को मिला जब गांव के एक कोटेदार बुधवार को तड़के लगभग पांच बजे कोटे की दूकान का पांच बोरा गेहूं गल्ला व्यवसायी को बेच रहा था, इसी बीच ग्रामीणों ने देख लिया।
इसके बाद गुस्साए ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान रंजना सिंह को इस बात से अवगत कराया। सूचना पाकर प्रधानपति अनिल सिंह ग्रामीणों के साथ मौके पर पहुंचे और कोटेदार के खिलाफ प्रदर्शन करने लगे। साथ ही विभागीय लिपिक को शिकायत दर्ज कराई।दुबारी गांव में पात्र गृहस्थी के लाभार्थियों को यूनिट के हिसाब से अनाज नहीं मिलने से लोगों में नाराजगी बढ़ने लगी है। बुधवार को तड़के दुबारी निवासी लीलावती पति बनारसी गुप्ता को ग्रामीणों ने गल्ला व्यवसायी को पात्र गृहस्थी का अनाज बेचते रंगे हाथों पकड़ लिया। सूचना पाकर मौके पर पहुंचे ग्रामीणों के साथ प्रधानपति का गुस्सा फूट पड़ा।
गुस्साए ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया इस बीच कोटेदार से उनकी नोकझोंक भी होने लगी। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पात्र कोटेदार गृहस्थी कार्डधारकों की सूची को सार्वजनिक नहीं कर रहा है और लाभार्थियों का अनाज खुले बाजार में बेच दिया जा रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत कराए जाने के बाद भी राशनकार्ड जारी नहीं किया जा रहा है। लेकिन अनाज का उठान किया जा रहा है। कहा कि मामले की अविलंब जांच नहीं कराई गई तो हमलोग आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
इस दौरान काफी विरोध करने के बाद भी गल्ला व्यवसायी ने अनाज वापस नहीं किया। उसके बाद प्रधानपति अनिल सिंह ने उपजिलाधिकारी मधुबन को फोन किया लेकिन फोन नहीं उठा। बाद में ग्रामीणों ने इसकी शिकायत पूर्ति कार्यालय मधुबन के लिपिक अमरनाथ मौर्य से की। लिपिक के आश्वासन के बाद ग्रामीण शांत हुए। प्रदर्शन करने वालों सुभाष धोबी, शांती देवी, बुधू लाल, नन्हे, रामअवध, सलाउदीन आदि शामिल थे।
खत्रीपार गांव की महिलाओं का प्रदर्शनः
घोसी(ब्यूरो)। घोसी ब्लॉक क्षेत्र के खत्रीपार गांव की महिलाओं ने बुधवार को पात्र गृहस्थी सूची से नाम काटने के विरोध में तहसील मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। साथ ही उपजिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने आरोप लगाया कि तत्कालीन जिलाधिकारी के आदेश पर अगस्त माह में तहसीलदार की देखरेख में पात्र गृहस्थी के लाभार्थियों की सूची बनी थी।
इसे कंप्यूटर में चढ़ाया भी गया लेकिन कार्यालय के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से पात्रों का नाम दो सितंबर को काट दिया गया और गलत ढंग से अपात्रों का नाम चढ़ा दिया गया। प्रदर्शन करने वालों मेें शकुंतला, बैजंती, राजमती, सोनकली, मंजू, अमरावती, मुन्नी, शिवकुमारी, प्रभा, राबड़ी, गुलैची, हौसिला, पुष्पा, कमलावती, राधिका, संजाफी, कमलावती, फूला देवी, पुष्पा, राधिका आदि शामिल थे।