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बिनु सत्संग विवेक न होई,राम कृपा बिनु सुलभ न सोई

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रतनपुरा। बिनु सत्संग विवेक न होई, राम कृपा बिनु सुलभ न सोई। यह विचार गाजीपुर से पधारे प्रख्यात संत अशोक आनंद जी ने पीपर साथ गांव के छल्ला पुरवा में नवनिर्मित मंदिर में मां दुर्गा की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में प्रवचन के दौरान व्यक्त किया। अशोक आनंद जी ने प्रवचन की महत्ता का वर्णन करते हुए कहा कि संत का समागम बड़े सौभाग्य से मिलता है। कहा कि संतों के मिलने से व्यक्ति की जिंदगी संवर जाती है। हमारे धर्म ग्रंथों में कहा गया है कि संत मिलन को जाइए, तजि ममता अभिमान। ज्यों ज्यों पग आगे बढ़े, कोटिक यज्ञ समान । उन्होंने कहा कि जब जब धरती पर अनाचार अत्याचार की अधिकता हुई। प्रभु ने किसी न किसी रूप में अवतार लेकर संतों और धर्म की रक्षा किया। मां दुर्गा ने भी अवतार लेकर पापियों का विनाश कर धर्म की रक्षा की। मां दुर्गा का मंदिर संपूर्ण क्षेत्र के लिए बड़े ही सौभाग्य की बात है। हम नवरात्र में मां दुर्गा की प्राण प्रतिष्ठा कर रहे हैं। इस प्रतिष्ठा कार्यक्रम में श्रद्धालु भक्तजन कोविड गाइड लाइन का पालन करते हुए प्रतिभाग कर रहे हैं। धार्मिक आयोजन में आस पास के विभिन्न गांवों के लोग आस्था के साथ हवन पूजन अर्चन में भाग ले रहे हैं और मां दुर्गा की पूजा कर आशीष पा रहे हैं। वेद मंत्रों की अनुपम सुमधुर ध्वनि और घंटा घड़ियाल की गूंज से संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो गया है। 13 अप्रैल नवरात्रि के प्रथम दिन से एक 23 अप्रैल तक चलने वाले प्राण प्रतिष्ठा के धार्मिक कार्यक्रम में भक्ति संगीत ,आस्था और विश्वास का संगम देखने को मिल रहा है। कार्यक्रम के समापन पर रविवार को विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
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