बढुआ गोदाम। छात्राएं अपने हक और कानूनी अधिकार के प्रति जागरूक बने और सकारात्मक सोचें। इससे उन्हें सदैव अच्छा करने की शक्ति मिलेेगी। स्कूलों, कोचिंग सेंटरों के आसपास अब छेड़खानी, छींटाकशी करने वाले बच नहीं पाएंगे। अब छात्राओं की सुरक्षा और शिक्षा के प्रति समाज जागरूक हुआ है। बेटियां जिस क्षेत्र में जाना चाहें, जा सकती हैं। ये बातें मंगलवार को ताजोपुर स्थित आदि शक्ति महाविद्यालय में अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता अभियान के तहत हुई गोष्ठी में उपनिरीक्षक व नारी सशक्तीकरण की प्रभारी विंध्यवासिनी पांडेय ने कहीं। गोष्ठी में शामिल 120 छात्राओं ने नारी सम्मान का संकल्प लिया।
विंध्यवासिनी पांडेय ने कहा कि सफलता न मिले तो छात्राओं को निराश नहीं होना चाहिए बल्कि परिश्रम जारी रखना चाहिए। उन्होंने छात्राओं को हेल्प लाइन नंबरों के बारे में बताया। कहा कि विपरीत परिस्थितियों में हेल्पलाइन नंबरों पर डायल करने पर पुलिस तत्काल पहुंचेगी और मदद करेगी। छात्राओं के साथ कोई घटना होती है तो आपात सेवा नंबर 112 पर डायल करें। मदद के लिए पुलिस पहुंचेगी। इसी प्रकार 1090, टोल फ्री नंबर यूपी 100, फायर स्टेशन का नंबर 101, चाइल्ड हेल्प लाइन 1098 पर सूचना दी जा सकती है। उन्होंने वरिष्ठ नागरिक सुरक्षा सबेरा कार्यक्रम के बारे में बताया। महिला कांस्टेबल पूनम यादव ने छात्राओं को आत्म सुरक्षा के गुर बताए। वन स्टाप सेंटर की मैनेजर संध्या सिंह ने छात्राओं को 181 और महिला सुमंगल योजना के बारे में जानकारी दी। अध्यापिका मनीषा सिंह ने कहा छात्राएं जागरूक बने। ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों एवं महिलाओं की स्थिति बदलने के लिए महिला अधिकार से जुड़े कार्यक्रम होने चाहिए।
आदि शक्ति महाविद्यालय के प्रबंधक रामजन्म सिंह ने अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि छात्राओं को जागरूक करने के लिए इस तरह के कार्यक्रम जरूरी हैं। आज महिला को सशक्त बनाने की बात चलने लगी है। महिलाएं सशक्त हैं लेकिन उन्हें अपनी सजगता और शक्ति का एहसास नहीं था, ऐसे में अपराजिता के जरिये तेजी से उनमें जागरूकता आ रही है।
छात्राएं बोलीं...
ग्रामीण अंचल में बेटियों की शिक्षा से ही राष्ट्र, समाज और परिवार की तरक्की होगी। बेटियां अब किसी भी क्षेत्र में बेटों से कम नहीं हैं।- दीपिका श्रीवास्तव बीकाम अंतिम वर्ष
- लड़कियां किसी भी अत्याचार और उत्पीड़न से डटकर मुकाबला करें, हिचकें नहीं, बल्कि हौसला रखकर मुसीबत का मुकाबला करें।-प्रियंका राव बीकाम फाइनल
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संघर्ष के साथ महिलाएं अपनी आवाज बुलंद करें। दहेज की मांग, भ्रूण हत्या और बेटियों के खिलाफ शोषण को कतई बर्दाश्त नहीं करें।-मनीषा गौतम बी. काम फाइनल
- लड़कियां किसी भी जुल्म या उत्पीड़न को चुप रहकर बर्दाश्त नहीं करें। इससे अपराधियों के हौसले बुलंद होते हैं। अत्याचार के खिलाफ खुलकर मुखर होएं।-श्वेता सिंह बीए अंतिम वर्ष
- माता-पिता घर में बेटियों को बेटों के बराबर सम्मान दें, तभी देश, समाज और परिवार में खुशहाली आएगी।-नीतू गोड बीए अंतिम वर्ष
- महिलाएं अपनी क्षमता कभी भी कम आंकने की गलती नहीं करें। यह कहावत बिल्कुल सही है कि जहां नारी का सम्मान होता है, वहां देवता वास करते हैं।-काजल सिंह बीकाम अंतिम वर्ष
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अपराजिता कार्यक्रम में महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं जो बहुत काम आएंगी। साफ सफाई से तमाम बीमारियों से बचा जा सकता है। कानूनी जानकारी भी मिली।-आफरीन नसीन बीएससी प्रथम वर्ष