मऊ। बच्चों में परीक्षा का तनाव होना स्वाभाविक है। इसको कम करने में अभिभावकों और शिक्षकों की अहम भूमिका है। ये बातें बच्चों में परीक्षा में तनाव प्रबंधन संबंधित कार्यशाला में डायट प्राचार्य जावेद आलम ने डायट सभागार मे बालसंरक्षण आयोग की तरफ से आयोजित कार्यशाला में कही।
मंगलवार को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की तरफ से आयोजित जनपदस्तरीय कार्यशाला में अभिभावकों, शिक्षकों और एकेडमिक टीम को बच्चों में परीक्षा के तनाव को कम करने के लिए जागरूक किया गया। डायट प्रवक्ता डॉ. अंशुमान सिंह ने तनाव को सकारात्मक प्रतिस्पर्धा के लिए एक सीमा तक सही माना बशर्ते उसे थोपा न जाए। एसआरजी अरविंद पांडेय ने कहा कि जब-जब अभिभावक बच्चों के साथ स्वयं नहीं बैठेंगे और उनकी मनोदशा और रूझान में सहयोग नहीं करे़ंगे, तनाव दूर नहीं किया जा सकता। बाल संरक्षण अधिकारी शिवानंद सिंह ने कहा कि नकारात्मक तनाव बच्चों में विद्रोह पैदा करता है। इसे सकारात्मक ऊर्जा में बदलना शिक्षक और अभिभावकों का दायित्व है। इस अवसर पर प्रवक्ता डॉ. संदीप राय, प्रवक्ता मुकेश, नगरशिक्षा अधिकारी सियाराम, एआरपी चंद्रधर राय, एआरजी राकेश कन्नौजिया, संजय तिवारी, शशिकला आदि रहे।