मऊ। जिले के सभी थानों के बेसिक फोन महीनों से खराब पड़े हैं। इन्हें बनवाने के प्रति न तो पुलिस महकमा और न ही बीएसएनएल के अधिकारी कर्मचारी ही रुचि ले रहे हैं। जिले के सभी 12 थानों पर बेसिक फोन की व्यवस्था पहले थी। लोगों को बेसिक फोन हमेशा याद रहते थे। क्षेत्र के लोग किसी भी प्रकार की महत्वपूर्ण अथवा गोपनीय सूचनाएं थानों को देते थे। किसी थाने के बेसिक फोन का बकाया बढ़ जाने से बीएसएनएल ने लाइन काट दी लेकिन बिल जमाकर उसे फिर से चालू कराने की जहमत नहीं उठाई गई। कुछ थानों के बेसिक फोन में खराबी आ गई। बीएसएनएल कर्मियों ने उसे ठीक करने में लापरवाही बरती। नतीजा यह हुआ कि एक-एक करके सभी थानों के बेसिक फोन खराब होते गए। एक समय था जब रोजाना शाम को छह बजे से थाने का मुंशी दिन भर के अपराध और उनके बारे में की गई कार्रवाई एसपी कार्यालय को नोट कराता था। बाद में जब यूपी डायल 100 पुलिस का गठन हुआ जो अब 112 कर दिया गया है। तब से थानों पर आने वाली शिकायतों का भार कम हुआ है। लोग कोई विवाद अथवा कोई घटनात्मक सूचना देने के लिए 112 का सहारा लेते हैं। लेकिन 112डायल की उपयोग केवल घटनात्मक सूचनाओं तक ही सीमित रह जाता है। इसके इतर कोई महत्वपूर्ण सूचना लोग 112 डायल पुलिस को न देकर थानों के मुंशी दीवान अथवा एसओ को देना चाहते हैं। ऐसी गोपनीय सूचनाएं पहले लोग थानों के बेसिक फोन के माध्यम से लोग देना सुरक्षित सुविधाजनक मानते थे। थानों के फोन लगातार महीनों से खराब होने से लोग इन थानों के नंबर भी भूलने लगे हैं। अब जबसे सीयूजी नंबर हर थानाध्यक्षों को आवंटित कर दिए गए हैं तब से लोग इन सीयूजी नंबरों पर काल कर बात कर लेते हैं लेकिन कार्य की व्यस्तता ,दौरों, बैठकों में होने के चलते अथवा कभी कभी बिना कारण ही थानाध्यक्षों के सीयूजी नंबर वाले मोबाइल रिसीव नहीं हो पाते इसलिए लोगों को खीज होती है। इसके अलावा थानों के मुंशियों की ड्युटी शिफ्ट वार बदलती रहती है। इसलिए भी लोगों का यह जानकारी नहीं हो पाती कि इस समय कौन मुंशी ड्युटी पर होगा। अधिकारियों का मानना है कि सीयूजी नंबर वाले मोबाइल से हर काम हो ही जाते है। अब कोई भी सख्श ऐसा नहीं है जिसके पास मोबाइल न हो और उसके मोबाइल में हर महीने डाटा पैकेज न भरा जाता हो। पुलिस अधीक्षक सुशील घुले ने बताया कि सभी थानों पर एसओ और महिला हेल्प डेस्क के पास सीयूजी मोबाइल उपलब्ध करा दिए गए हैं। इस प्रकार प्रत्येक थानों पर दो दो सीयूजी मोबाइल उपलब्ध हैं।जब जिसे जरूरत होती है इन सीयूजी नंबरों पर काल कर एसओ से बात कर सकते हैं। इतना नहीं चौकियों के प्रभारियों को भी सीयूजी नंबर के साथ मोबाइल उपलब्ध करा दिए गए हैं। इसलिए अब लैंड लाइन फोन की जरूरत भी नहीं होती है।