मऊ। नए साल में निर्माणाधीन बाल निकेतन रेलवे क्रॉसिंग पर निर्माणाधीन आरओबी को लेकर एक नया मोड़ आया है। आठ जनवरी को जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि आरओबी की जद में आने वाली दुकानों-मकानों को अब बिना हाईकोर्ट के इजाजत के ध्वस्त न किया जाए।
साथ ही इस मामले में 17 फरवरी को अगली सुनवाई होगी। ऐसे में यह आदेश बेहद मायने रखता है जब एक तरफ छह पिलर का कार्य पूरा होने के बाद रेलवे लाइन के दूसरे तरफ पिलर का कार्य तेजी से किया जा रहा है।
आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति विकास ने बुधवार को एक जनहित याचिका की सुनवाई की। इस दौरान जिलाधिकारी मऊ और नगर मजिस्ट्रेट की ओर से दाखिल शपथ पत्र से असंतुष्टी जताई। साथ ही बाल निकेतन ओवर ब्रिज के निर्माण के जद में आने वाली 250 दुकानों, घर, सरकारी भवन, पूजा स्थल के ढांचे को ध्वस्त करने पर रोक लगा दी।
आदेश दिया कि जब तक मालिक अथवा कब्जाधारी स्वेच्छा से अपने मकान अथवा जमीन को देने के लिए अपनी सहमति न दे दें। तब तक इन्हें ध्वस्त नहीं किया जाए। उच्च हट्ठीमदारी सिंधी कॉलोनी निवासी कमलेश कुमार की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की थी।
इसमें उत्तर प्रदेश सरकार, जिलाधिकारी मऊ, नगर मजिस्ट्रेट सहित सात लोगों को विपक्षी बनाया था।
पीएचसी बल्ह टिक्कर भवन- फोटो : स्रोत:ग्रामीण
पीएचसी बल्ह टिक्कर भवन- फोटो : स्रोत:ग्रामीण
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