मऊ। ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों को बेहतर शिक्षा और पोषण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिले में नई पहल की जा रही है। विलय के बाद खाली पड़े परिषदीय विद्यालयों के भवनों को अब बाल वाटिका के रूप में विकसित किया जाएगा। जहां आंगनबाड़ी केंद्रों को स्थानांतरित किया जाएगा। इस कदम से नौनिहालों और गर्भवती महिलाओं को अधिक व्यवस्थित और सुसज्जित स्थानों पर बेहतर सुविधाएं मिलेगी। विभाग की तरफ से सर्वे शुरू हो गया है। जिले में 1208 परिषदीय विद्यालय हैं। 50 से कम छात्र संख्या वाले 341 परिषदीय विद्यालयों को विलय करने की प्रक्रिया चल रही है। प्रथम चरण में जिले में 215 परिषदीय विद्यालयों का विलय कर दिया गया है। विलय के बाद खाली हुए प्राइमरी स्कूलों में दो महीने के अंदर आंगनबाड़ी केंद्र स्थानांतरित किए जाएंगे। इससे संसाधनों के बेहतर प्रयोग के लिए पेयरिंग के बाद विद्यालयों का प्रयोग बाल वाटिका के रूप में किया जाएगा।
शासन की तरफ से इसके लिए जिला प्रशासन को स्थानांतरण की प्रकिया और टाइमटेबल जारी किया गया है। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग और बेसिक शिक्षा विभाग की तरफ से अब स्कूलों की सर्वे प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस स्थानांतरण में उन स्कूलों की पहचान की जाएगी, जहां पर्याप्त जगह और सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति गठित की गई है। इसमें मुख्य विकास अधिकारी अध्यक्ष, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सदस्य सचिव, जिला कार्यक्रम अधिकारी सदस्य, संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी सदस्य, संबंधित बाल विकास परियोजना अधिकारी सदस्य शामिल हैं। यह समिति स्थानांतरण प्रक्रिया की देखरेख करेगी। स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में उपलब्ध सुविधाओं का सर्वेक्षण किया जाएगा। जहां जरूरत होगी, वहां अतिरिक्त सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
215 परिषदीय विद्यालयों की विलय की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। खाली विद्यालयों का प्रयोग बाल वाटिका के रूप में किया जाएगा। इसके लिए सर्वे किया जा रहा है। शीघ्र ही प्रक्रिया पूरी की जाएगी। - संतोष कुमार उपाध्याय, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, मऊ