स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत गांवों में खुले में शौच रोकने के लिए बनी शौचालयों की योजना को पंख नहीं लग पा रहा। कहीं लोगों की सोच आड़े आ रही, कहीं सरकारी धन की कमी से शौचालय नहीं बन पा रहे। इसके चलते स्वच्छ भारत मिशन का सपना 2019 तक कैसे पूरा होगा। हालांकि विभाग का मानना है कि जागरूकता से ही खुले में शौच पर लगाम लगाया जा सकता है।
जिले में स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत पूर्व में विभिन्न ब्लाकों के आठ गांवों का चयन किया गया था। इसमें कंधेरी, सरवांगरीबपुर, बकराबाद, दौलतपुर, नवली, पतनीई बुजुर्ग एवं बसियारामपुर सहित देवरियाखुर्द गांवों में भारत सरकार की टीम पहुंची थी।
सर्वप्रथम प्रयोग के तौर पर इन गांवों में निगरानी समिति का गठन कर सदस्यों के मोबाइल नंबरों को वाट्सएप ग्रुप बनाकर जोड़ा गया था। इन गांवों में हालांकि ज्यादातर लोगों में जागरूकता आई। इसके बाद जिले के नौ ब्लाकों में 27 और गांवों का चयन किया गया।
इन गांवों में खुले में शौच से मुक्ति दिलाने के लिए अभियान भी चलाया जा रहा है। साथ ही गरीब परिवारों को शौचालय बनाने के लिए अनुदान भी दिए जा रहे हैं। लेकिन जिस प्रकार से विभाग गांवों का चयन कर उन्हें खुले में शौच कराने से मुक्त कराने का अभियान चला रहा है। उससे किस प्रकार 2019 तक जिले को खुले में शौच करने से मुक्त किया जाएगा।