जिले के सभी सीएचसी, पीएचसी और अधिकतर शैक्षणिक संस्थानों पर मंगलवार को विश्व मलेरिया दिवस मनाया गया।इस अवसर पर शिविर, गोष्ठी, परिचर्चा और पेंटिंग प्रतियोगिता के माध्यम से लोगों को मलेरिया के बारे में जागरूक किया गया। मुख्य चिकित्साधिकारी डा. नरेश अग्रवाल ने बताया कि पहले केवल बारिश के मौसम में ही मच्छरों का प्रकोप दिखता था। लेकिन अब दो या तीन महीने छोड़ दीजिए तो पूरे साल ही मच्छरों का प्रकोप दिखते हैं। इसलिए अब आवश्यकता पड़ने पर वर्ष भर मलेरिया के रोकथाम के लिए लार्वीसाईड का छिड़काव किया जाएगा। साथ ही स्वास्थ्य विभाग की टीमें सर्वाधिक मच्छरों के प्रकोप वाले इलाकों को चिन्हित कर रही हैं। इस बार विश्व मलेरिया दिवस की थीम शून्य मलेरिया देने का समय निवेश, नवाचार, कार्यान्वयन है। इस थीम का उद्देश्य वैश्विक उन्मूलन लक्ष्यों को प्राप्त करने में नवाचार की ओर ध्यान आकर्षित करना और उनको जमीनी स्तर पर क्रियान्वित करना है।जिला मलेरिया अधिकारी बेदी यादव ने बताया कि वर्तमान में संचालित संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान के अंतर्गत शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में मच्छरों के प्रजनन स्रोतों को नष्ट कराया जा रहा है।एंटी लार्वा का छिड़काव तथा नगर क्षेत्र में फागिंग भी कराया जा रहा है। मलेरिया की जांच व उपचार की सुविधा जिला महिला अस्पताल, जिला अस्पताल और सभी सीएचसी पीएचसी पर उपलब्ध है। आशा कार्यकर्ता तथा स्वास्थ्य कार्यकर्ता पुरुष ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर रोगियों की पहचान कर रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (आरडीटी) किट से त्वरित जांच कर रही हैं।