मऊ। कोरोना संक्रमण के बढ़ते ग्राफ के बाद भी अब भी लोग जागरूकता नहीं बरत रहे हैं। लापरवाही तो इस हद तक बरती जा रही है कई लोग संक्रमण के लक्षण दिखने के बाद भी जांच कराने के बजाए खुद ही चिकित्सक बनकर दवा लेने लग रहे हैं। ऐसे में स्थिति बिगड़ने लगती है। अगर लक्षणों को नजरअंदाज करने पर संक्रमण फेफडे़ को संक्रमित करने लगता है। वहीं जागरूक मरीज डॉक्टर की सलाह से दवा लेकर जल्द ठीक हो जा रहे हैं।
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. शैलेष कुशवाह बताते हैं कि जिला अस्पताल की इमरजेंसी में आने वाले केसों में 40 फीसदी केस फेफडे़ में संक्रमण के आ रहे हैं। जहां इन मरीजों का सिटी स्कैन कराने पर 50 फीसदी से 90 फीसदी तक संक्रमण मिल रहा। बताया कि बातचीत करने पर पता चल रहा है कि मरीज को सांस लेने में तकलीफ कई दिन से हो रही है। लेकिन शुरुआत दो-तीन दिन वह इसको लेकर गंभीरता नहीं दिखा रहा है। इससे संक्रमण दायरा बढ़ाने में सफल रह रहा है। जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि संक्रमण के शुरूआती पांच दिन खास होते हैं, इसकी पहचान होने पर दवा शुरू होने पर व्यक्ति लेट से इलाज कराने वाले मरीज के सापेक्ष जल्द ही रिकवर हो जाता है। कहा कि अगर किसी को संक्रमण का कोई लक्षण अपने में दिखे तो चिकित्सक से परामर्श पर दवा खाना शुरू कर दे। जिससे संक्रमण को वह अपने शरीर में बढ़ने से रोक सके।
जागरूकता भी बरत रहे हैं लोग
मऊ। संक्रमण की इस दूसरी लहर में डाक्टरों के पास पहुंच रहे लोगों को चिकित्सक कोरोना जांच कराने को कह रहे हैं। कई लोगों द्वारा एंटीजेन के बजाए आरटीपीसीआर जांच को प्राथमिकता देते हुए सैंपल दे रहे है। लेकिन इसकी रिपोर्ट तीन से चार दिन में आ रही है। इसको देखते हुए अपने अंदर संक्रमण का लक्षण महसूस होने पर लोग रिपोर्ट आए बिना ही चिकित्सक के परामर्श पर दवा का ले रहे हैं।
इन बातों का रखे ख्याल
मऊ। सीएमओ डॉ. सतीशचंद्र सिंह ने कहा कि लोगों को इस संक्रमण की दूसरी लहर से बचाव को लेकर सर्तकता बरतना जरूरी है। सैंपल देने के बाद रिपोर्ट न आने तक आइसोलेट रहे। डाक्टर के परामर्श पर ही एंटीबायोटिक दवाइयों का प्रयोग करें, खुद से दवा नहीं लें। यादि आक्सीजन लेबल 94 से कम हो जाता है तो ऐसे में प्रोन पॉजिशन करे। इसमें 20 मिनट छाती के बल लेटे, फिर इतने समय ही दायी और बायी करवट लेकर आक्सीजन लेबल बढ़ा सकते हैं।