किसी जमाने में ऋषियों मुनियों की तपो स्थली और पावन तमसा नदी गंदगी, कचरा व दूषित पानी के चलते जहरीली हो चुकी है। जनपद में प्रवेश द्वार मुहम्मदाबाद गोहना क्षेत्र से ही प्रदूषण का शिकार होने वाली तमसा की सफाई के लिए कोई ठोस योजना नहीं बनी है। मुहम्मदाबाद गोहना कस्बा में ही रोजाना लाखों किलो लीटर गंदा पानी व कचरा गिरने से कस्बा के पास तमसा का पानी काला हो गया।
यहां तमसा नाले के रूप में परिवर्तित हो गयी है। कुछ साल पहले तक बारह महीनों तक साफ पानी से लबालब रहने वाली तमसा में मौजूदा समय घुटनों तक भी पानी नहीं है। सफाई के लिये कोई न तो कार्यदायी संस्था और न ही कोई प्रशासनिक कदम ही उठाया जा सका है।
त्रेता युग में कभी भगवान श्रीराम के विश्राम स्थल का व देवल मुनि की तपस्थली का गवाह रही तमसा नदी मौजूदा समय में प्रदूषित होने के साथ ही जहरीली भी हो चुकी है। मऊ जनपद में प्रवेश के दौरान वलीदपुर व मुहम्मदाबाद गोहना नगर पंचायत से ही तमसा में गंदगी गिरने का सिलसिला शुरू हो जाता है।
मुहम्मदाबाद गोहना नगर पंचायत व आसपास की आबादी का लाखों किलो लीटर गंदा पानी रोजाना तमसा में गिर रहा है। गंदे पानी की रोकथाम को लेकर नगर पंचायत अथवा शासन प्रशासन द्वारा कोई भी कार्य योजना नहीं बनाई जा सकी है।
दर्जनों बूचड़खानों से निकलने वाला कचरा भी तमसा में गिर रहा है। कस्बा को बाढ़ से बचाव के लिये नदी बंधा पर तीन स्थानों पर रेगूलेटर बनाए गए हैं इनसे कचरा व गंदा पानी लगातार नाले में गिरता रहता है।