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जायरीन से गुलजार रहा आस्ताना

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चिरैयाकोट में मखदूम साहब के मजार पर गागर चादर लेकर जाते लोग।संवाद - फोटो : MAU
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चिरैयाकोट। कस्बा स्थित बाबा हजरत मखदूम इस्माइल हसन अब्बासी साहब का 621 वां उर्स मंगलवार को अकीदत के साथ मनाया गया। इस दौरान आस्ताना जायरीन से गुलजार रहा। लोगों ने आस्ताने पर हाजिरी लगाई और मन्नतें मांगीं। इस दौरान इलाके में मेले का माहौल रहा। मंगलवार को सुबह से ही लोगों का हुजूम मजार पर एकत्र होने लगा था। तकिया बाजार से चादर, गागर का जुलूस शाम को आस्ताने पर पहुंचा। वहां पर कुरानख्वानी और कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। देर शाम हुए जलसे की निजामत मौलाना अख्तर ने की। जलसे में तकरीर करते हुए मौलाना अफरोज, मौलाना मकबूल, अजहरूल इस्लाम, मौलाना हाफिज शमीम, मौलाना फारुख, मौलाना अब्दुर्रऊफ और मौलाना अनवर ने कहा कि हजरत बाबा मखदूम ने अपना जीवन अमन शांति व भाईचारे को बढ़ाने में व्यतीत किया। अन्याय और जुल्म से चिरैयाकोट को निजात दिलाई। वह एक सूफी संत थे। वह खाड़ी देश के अदन से इब्राहिम शाह शर्की के शासन काल में अपनी जागीरदारी को छोड़कर दिल्ली, जौनपुर होते हुए चिरैयाकोट तशरीफ़ लाए थे। इस दौरान हाशिम सजाद, मौलाना अख्तरूल इस्लाम, नासिर रजा, मौलाना अख्तर ने नातिया कलाम पेश किए। इस मौके पर पूर्व प्रधान अब्दुल सत्तार कुरैशी, हाजी जमालुद्दीन, मास्टर इकबाल, इरशाद प्रधान, इंसाफ प्रधान, अब्बास अली आदि शामिल रहे।
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