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अस्ताचलगामी सूर्य को दिया अर्घ्य

Sun, 06 Nov 2016 11:43 PM IST
ब्यूररो,अमर उजाला/मऊ
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दोहरीघाट के घाघरा नदी में रविवार को छठ पूजा के दौरान अस्ताचलगामी सूर्य की आराधना करतीं व्रती महिलाएं
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कांचहि बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए... डाला छठ पर्व पर कुछ ऐसी ही गीतों से जिले का का कोना-कोना गूंजता रहा। रविवार को अपने परिवार की सुख शांति और संपन्नता के अलावा पुत्र प्राप्ति की कामना को लेकर निर्जला व्रत रखने वाली महिलाओं ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्यदान दिया। 
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छठ पर्व के मद्देनजर नगर सहित जिले के प्रमुख बाजारों में तड़के से ही गहमागहमी रही। रविवार को अवकाश का दिन होने के बाद भी बाजारों में चहलपहल रही। छठ पर्व को लेकर मान्यता है कि लंका विजय के बाद रामराज्य की स्थापना के दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को भगवान राम और माता सीता ने उपवास किया और सूर्यदेव की आराधना की। सप्तमी को सूर्योदय के समय पुन: अनुष्ठान कर सूर्यदेव से आशीर्वाद प्राप्त किया था। एक अन्य मान्यता के अनुसार छठ पर्व की शुरुआत महाभारत काल में हुई थी। सबसे पहले सूर्य पुत्र कर्ण  ने सूर्य देव की पूजा शुरू की। कर्ण भगवान सूर्य का परम भक्त था। वह प्रतिदिन घंटों कमर तक पानी में खड़े होकर भगवान सूर्य को अर्घ्य देता था। सूर्य की कृपा से ही वह महान योद्धा बना था। आज भी छठ में अर्घ्य दान की यही पद्धति प्रचलित है। पांडवों की पत्नी द्रोपदी द्वारा भी सूर्य की पूजा करने का उल्लेख है। वे अपने परिजनों के उत्तम स्वास्थ्य की कामना और लंबी उम्र के लिए नियमित सूर्य पूजा करती थीं। इन्हीं मान्यताओं को देखते हुए फूल और अन्य पूजन सामग्रियों के साथ महिलाएं परंपरागत रूप से गाजे बाजे के साथ छठ माता के गीत गाते हुए अपने घरों से निकलीं। व्रती महिलाओं ने अपनी यह पूजा नदी और पोखरों के घाटों पर पहुंचकर की। नदी और पोखरों के घाटों पर पूरी तरह मेले जैसा दृश्य था। इस बीच खासतौर से तमसा और सरयू तट पर श्रद्धालु महिलाओं की भीड़ उमड़ी। छठ पूजा सोमवार की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्यदान देकर पूरी होगी। इसके साथ ही महिलाएं अपने व्रत का पारण करेंगी। रविवार की शाम व्रती महिलाओं ने छठ पूजा के लिए सूप और डलिया लेकर पूजा सामग्री और फल आदि सजाकर घाटों पर गईं, जहां उन्होंने परंपरा निभाई। यही वजह था कि खास तौर से नगर क्षेत्र के तमसा तट पर स्थित हनुमानघाट, ढेकुलियाघाट और रामघाट, बमघाट, मड़ैयाघाट, सत्तीघाट, नागा बाबा की कुटी आदि स्थानों पर महिलाओं की भारी संख्या रही। इसके अलावा नगर क्षेत्र के ब्रह्मस्थान पोखरा, शीतला माता धाम, वनदेवी धाम स्थित पोखरा, देवलास स्थित पोखरे पर भी महिलाओं ने सूर्य को अर्घ्य दिया।
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