देश की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रामनयन मल्ल का रविवार को अपने पैतृक निवास पांती में निधन हो गया। सेनानी रामनयन मल्ल 93 वर्ष के थे और काफी दिनों से बीमार चल रहे थे। उनके निधन की सूचना से गांव सहित आसपास के क्षेत्रवासी मर्माहत है। उनका अंतिम संस्कार दोहरीघाट मुक्तिधाम पर किया गया। इसके पहले उन्हें गांव पर ही गार्ड आफ ऑनर दिया गया।
वर्ष 1923 में जन्मे सेनानी रामनयन मल्ल को सन 1942 के अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन में दाहिने पैर के घुटने के नीचे गोली लगी थी। उस समय काफी दिनों तक अंग्रेजी हुकूमत की यातना का शिकार होना पड़ा था। देश को आजाद कराने में उनकी संघर्ष की गाथा को देश हमेशा याद रखेगा। मधुबन कस्बे से सटे रामनयन मल्ल का घर पांति में स्थित है। देश को अंग्रेजी हुकूमत से आजाद कराने के लिए जिस समय अंग्रेजों भारत छोड़ो, करो या मरो जैसे नारे गूंज रहे थे उस समय रामनयन कक्षा दसवीं के छात्र थे।
जगह-जगह हो रहे आंदोलनों से प्रेरित होकर उन्होंने अपने को आंदोलन का हिस्सा बना लिया और पढ़ाई के साथ आंदोलनों में भी सक्रियता दिखाने लगे। क्षेत्र के रामनक्षत्र पांडेय, माता प्रसाद पांडेय, रामसुंदर पांडेय, मंगलदेव ऋषि आदि के संपर्क में आने के बाद उनका ध्यान पढ़ाई में कम आंदोलन में ज्यादा लगने लगा। यही कारण था कि वह आंदोलनों के दौरान कई बार जेल भी गए और अंग्रेजी हुकूमत की लाठियां भी खाईं। उनकी आजादी की लड़ाई का जुनून और देश भक्ति का अंदाजा इस बात से और लगाया जा सकता है कि जब वह मधुबन में अंग्रेजों के बनाए स्कूल में पढ़ाई कर रहे थे उसी समय खीरीकोठा के लक्ष्मीकांत पांडेय द्वारा स्कूल खोला गया तो वह अंग्रेजों के स्कूल को छोड़कर उन्होंने स्कूल में दाखिला ले लिया।
इसी बीच आजादी के दीवाने क्रांतिकारियों ने थाने पर चढ़ाई करके अंग्रेजों से सत्ता अपने हाथ में लेने के लिए आंदोलन की धार तेज कर दी। चारों ओर क्रांतिकारियों ने चुपके-चुपके यह खबर फैला दी और 15 अगस्त 1942 को एक बड़ा आंदोलन हुआ था। इस आंदोलन में क्षेत्र के चारों दिशाओं से हजारों लोगों ने भाग लिया।
सरकारी दूकानों को जलाते, तोड़फोड़ करते आंदोलनकारी देर शाम तक थाने पर जुट गए। कलेक्टर निबलेट के आदेश पर 149 राउंड गोली भारतीयों पर चलाई र्गइं। जिसमें से एक गोली रामनयन मल्ल को पैर में लगी और वह वहीं घायल होकर गिर गए। लोगों की मदद से उन्हें छिपकर घोसी एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। लेकिन कुछ दिन बाद ही उन्हें इलाज के दौरान अंग्रेजी सिपाहियों ने पकड़ कर जेल भेज दिया।
जंगे आजादी के बाद 25 साल पूरे होने पर देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने गोरखपुर में अपने आगमन पर रामनयन मल्ल को ताम्र पत्र भेंट किया था। जो आज भी उनके पास आजादी की स्मृति शेष है। सेनानी रामनयन मल्ल ने कहा था कि देश को आजादी तो मिली लेकिन देश की जो तरक्की चाहिए वह आज तक नहीं मिली। ग्राम प्रधान हरिमोहन मल्ल, आलोक मल्ल, उमाशंकर मल्ल, वीरेंद्र मल्ल, अजय मल्ल, शिवानंद मल्ल, राकेश मल्ल, प्रेमभूषण पांडेय आदि ने सेनानी को पुष्प अर्पित कर परिवार के प्रति शोक संवेदना प्रकट की।