नगर के बकवल स्थित प्राथमिक स्कूल के प्रांगण मं मौजूद भवन।संवाद
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मऊ। नगर सहित जिले के विभिन्न क्षेत्रों के परिषदीय विद्यालयों के कैंपस में निष्प्रयोज्य जर्जर भवन दुर्घटना को दावत दे रहे हैं। अभिभावक भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर दहशतजदा हैं। विभाग की तरफ से 76 निष्प्रयोज्य जर्जर भवनों का मूल्यांकन करने के लिए एक साल पहले शासन से गठित तीन सदस्यीय टीम को पत्र भेजा। लेकिन अभी तक मूल्यांकन प्रक्रिया अधर में है। अधिक मूल्यांकन किए जाने से कोई भी नीलामी में शामिल नहीं हो रहा है। जिले में 1208 परिषदीय विद्यालय हैं। विभिन्न क्षेत्रों में तमाम ऐसे विद्यालय हैं, जिनके पुराने भवन जर्जर हो चुके हैं। यह भवन पूरी तरह निष्प्रयोज्य हैं। दोपहर के अवकाश के बाद बच्चे इन भवनों में या आसपास खेलते हैं। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावक चिंतित हैं। अभिभावक ऐसे भवनों को ध्वस्त किए जाने की मांग लंबे समय से कर रहे हैं। शासन के निर्देश पर संबंधित भवनों के मूल्यांकन के लिए तीन सदस्यीय टीम का गठन किया गया है। जिसमें पीडब्ल्यूडी, सिंचाई विभाग व ग्रामीण अभियंत्रण के अधिकारी शामिल हैं। यह टीम भवनों का स्थलीय जायजा लेकर उसका मूल्यांकन निर्धारित करेगी। टीम की रिपोर्ट के बाद बीएसए कार्यालय की ओर से ध्वस्तीकरण के लिए नीलामी की जाएगी। अधिक बोली लगाने वाली संस्था को ध्वस्तीकरण की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। अधिकारियों की मानें तो तकनीकी समिति ने निष्प्रयोज्य भवनों का मूल्यांकन काफी ज्यादा कर दिया जिससे नीलामी प्रक्रिया में कोई शामिल होने को तैयार नहीं हो रहा है। बेसिक शिक्षा विभाग ने दोबारा मूल्यांकन करने के लिए तकनीकी समिति को पत्र भेजा है। तकनीकी पेंच से मामला अधर में लटकने से अभिभावक परेशान हैं। इस मामले में कोई जिम्मेदार कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। बीएसए डॉ. संतोष कुमार सिंह ने बताया कि परिषदीय विद्यालयों के कैंपस में 76 निष्प्रयोज्य जर्जर भवनों का मूल्यांकन काफी अधिक हो जाने से नीलामी प्रक्रिया मेें कोई शामिल नहीं हो रहा है। समिति को मूल्यांकन कम करने के लिए पत्र भेजा गया है। वहीं ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अभिनव श्रीवास्तव ने बताया कि निष्प्रयोज्य जर्जर भवनों का मूल्यांकन शासन से जारी गाइड लाइन के अनुरुप किया गया है। बेसिक शिक्षा विभाग के पास मूल्यांकन कम करने का यदि कोई शासनादेश हो तो उपलब्ध कराए।