मऊ। जिले में अवैध जहरीली शराब से पिछले एक साल में मौत भले ही विभागीय रिकार्ड में एक भी नहीं हुई हो लेकिन यह कारोबार जिले के कोने-कोने तक फैल चुका है। देवारा से लेकर कछार तक इस कारोबार से शराब माफिया दिनों दिन मालामाल हो रहे हैं। विभागीय कार्रवाई के बाद भी कारोबारियों के काम पर कोई अंकुश नहीं लग पाता है। वह जेल से छूटने के बाद फिर से यही कारोबार शुरू कर देते हैं। जिले में हालांकि जहरीली शराब से पांच लोगों की मौत का मामला चार वर्ष पूर्व मुहम्मदाबाद गोहना में प्रकाश में आया था लेकिन तब से एक्का-दुक्का मौत के बाद इसकी जांच पड़ताल कराने की जहमत न तो विभाग उठाता है और न ही परिजन इस प्रकार की मौत हो जाने पर उसके विरुद्ध आवाज उठा पाते हैं। यही कारण है कि यह कारोबार दिनों दिन घटने के बजाए बढ़ने ही लगा है।
जिले में पूर्व में सिर्फ देवारा क्षेत्र में ही कचिया शराब का कारोबार फैला हुआ था लेकिन अब यह धीरे-धीरे पूरे जिले में फैल चुका है। कहीं अंग्रेजी अवैध शराब हरियाणा एवं पंजाब से मंगाकर उसमें मिलावट कर बेची जाती है तो कहीं प्लास्टिक की पन्नियों में सीधे शीरे के रूप में बेची जाती है। कचिया शराब का जो कारोबार है वह पहले से ही अनवर जारी है। आबकारी और पुलिस विभाग आए दिन अभियान चलाते भी रहते हैं और इसमें कारोबारी पकड़े भी जाते हैं लेकिन फिर भी इस कारोबार पर कोई अंकुश नहीं लग पाता है। आबकारी अधिकारी शैलेंद्र सिंह का कहना है पिछले एक साल में एक भी जहरीली शराब से मौत का मामला प्रकाश में नहीं आया है। समय-समय पर अवैध शराब पर अंकुश लगाने के लिए अभियान चलाकर कारोबारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाती है।
इनसेट
तटीय इलाके में फैला है कारोबार
मधुबन। थाना क्षेत्र के देवरांचल स्थित घाघरा नदी के तटीय इलाके में अब एक बार फिर अवैध रूप से संचालित कचिया शराब की भठ्ठियां धड़ल्ले से धधकने लगी है। हालांकि इस धंधे पर काफी हद तक पुलिस ने रोक लगा रखी थी लेकिन अब फिर से यह धंधा नदी के तटवर्ती क्षेत्र से लेकर गांवों की सरहदों पर बतौर कुटीर उद्योग के रूप में पनपने लगा है।
देवारा के दुर्गम इलाकों में उत्पादित शराब की खेप करोबारियों द्वारा क्षेत्र के विभिन्न गांवों में अवैध रूप से बेचने वाले विक्रेताओं को देकर कचिया शराब के धंधे को बढ़ावा दे रहे हैं। स्थानीय लोगों ने इस धंधे को पूरी तरह बंद करने की मांग की है। थाना क्षेत्र के सूरजपुर से लेकर धर्मपुर, नुरूल्लाहपुर, कचिला नरायनपुर, सारंगपुर, सिकरीकोल, सुग्गिचौरी, हाता, चक्की मुसडोही गजियापुर परसिया जयरामगिरी सहित जनपद देवरिया के दो गांवों में अवैध कचिया शराब का धंधा पिछले दो दशक से ब्यापक रूप में चलता है।
बेरोजगार युवाओं को बनाया जाता है शिकार
मधुबन। चक्कीमुसाडोही से लेकर इन क्षेत्रों में बेकारी होने के नाते अधिकांश युवा भी इस धंधे में लिप्त होते जा रहे हैं। कम मेहनत में अधिक पैसे कमाने की लालच एवं बेरोजगारी के चलते युवा भी इस धंधे में शामिल होते जाते हैं। शराब माफिया पुलिस से सुरक्षा के लिए विशेषकर घाघरा नदी के तटीय इलाकों को चुनते है।जहां आसानी से पुलिस न पहुंच सके। यही कारण है कि सफेदपोश कचिया शराब माफिया इसे प्रतिदिन कुटीर उद्योग के रूप में बनाने व विकसित करने में लगे है।
सुदूर गांवों में भेजी जाती है शराब की खेप
मधुबन। शराब माफियाओ द्वारा इन स्थानों से उत्पादित शराब की खेप बिक्री के लिए सुदूर गांवो में भेंजकर सप्लाई कराई जाती है। इसके चलते इन गांव-गिरांव का भी माहौल दूषित होने लगा है। क्षेत्र में धधक रही मौत की इन भठ्ठियों पर रोक लगाने के लिए चक्कीमूसाडोही के ग्राम प्रधान नंदलाल यादव ने उच्चाधिकारियों को शिकायती प्रार्थना पत्र देकर रोक लगाने की मांग भी की है।
लाखों के राजस्व का भी घाटा
मधुबन(ब्यूरो)क्षेत्र में अवैध कचिया शराब के उत्पादन से सरकार को जो राजस्व का घाटा होता है वह तो अलग है इसका सेवन करने वाले अधिकांश गरीब परिवार के लोग आये दिन किडनी,लिवर और फेफड़े की शिकायत से असमय दम तोड़ रहे है। थाना क्षेत्र में पुलिस ने शराब माफिया के रूप में अमरजीत यादव, गोवर्धन, नगेसर सहित कई लोगों के खिलाफ गैंगेस्टर जैसी कार्रवाई भी की है।
चिह्ति होंगे शराब माफिया
पुलिस अधीक्षक अभिषेक यादव का कहना है कि जिले में शराब माफियाओं की सूची बनाई जा रही है। इन शराब माफियाओं को चिंहित कर उनके विरुद्ध गैंगस्टर, गुंडा एक्ट की कार्रवाई की जाएगी साथ ही इस कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए आबकारी विभाग के साथ मिलकर संयुक्त कार्रवाई की जाएगी।