मऊ। गर्मी का मौसम शुरू होते ही कुत्ते के काटने से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन 60-65 मरीज पहुंच रहे हैं। स्थिति यह है कि जिला अस्पताल में 20 दिन से एंटी रेबीज वैक्सीन का टोटा है। ऐसी स्थिति में पीड़ित मरीज बाहर से महंगे दाम पर वैक्सीन खरीद कर इंजेक्शन लगवा रहे हैं।
शहर के 42 वार्डों में आवारा कुत्तों की संख्या हजारों में है। नगर पालिका की ओर से यदा कदा छुट्टा पशुओं की धरपकड़ की जाती है लेकिन आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए कोई अभियान नहीं चलता है। आवारा कुत्ते आए दिन लोगों को काटते रहते हैं। यही वजह है कि जिले में कुत्ते के काटने और जानवरों के हमलों का ग्राफ बढ़ रहा है। जिला अस्पताल के आंकड़ों पर नजर डालें तो जनवरी 2020 से 26 फरवरी 2021 तक कुत्ते के काटने से पीड़ित 11556 मरीज आए। वर्ष 2019 में 11223 और 2018 में 5948 ऐसे मरीज आए थे। यह आंकड़ा सिर्फ जिला अस्पताल का है। जिले के नौ सीएचसी तथा 40 पीएचसी को भी शामिल किया जाए तो ये आंकड़े बढ़ जाएंगे। जिला अस्पताल में प्रतिदिन कुत्ता के काटने से पीड़ित मरीज आ रहे हैं लेकिन एंटी रेबीज वैक्सीन नहीं होने से मरीजों को बैरंग लौटना पड़ रहा है। निजामुद्दीनपुरा निवासी दीपक के पैर में बृहस्पतिवार को कुत्ते काट लिया। इसके बाद वह एंटी रैबीज लगवाने के लिए जिला अस्पताल पहुंचा लेकिन संबंधित कक्ष बंद था। पूछने पर उसे बताया गया कि 26 फरवरी से एंटी रेबीज वैक्सीन नहीं है। इसके बाद दीपक ने बाहर से एंटी रेबीज इंजेक्शन खरीदकर लगवाया। इसी तरह गाजीपुर के मरदह से आए रामनारायण, राजीव, सोनू को जिला अस्पताल में एंटी रेबीज इंजेक्शन न होने पर बाहर से खरीद कर लगवाना पड़ा। पीड़ितों को निजी अस्पतालों में 300 से 350 रुपये देकर एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाना पड़ रहा है।