विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण में ड्यूटी पर जाते समय पुलिस कर्मियों को समझाते पुलिस अधीक्षक अरविंद सेन।
िले की सुरक्षित सीट मोहम्माबाद गोहना दलित बाहुल्य क्षेत्र है। दलितों के अलावा यहां अल्पसंख्यक मतदाताओं की संख्या भी अच्छी-खासी है। आजमगढ़ जिले की सीमा से लगी जनता ने इस सीट पर शुरू से ही ज्यादातर बार दूसरे विधान सभा क्षेत्रों के रहने वाले लोगों को विधायक बनने का मौका दिया है। इस बार भी प्रमुख दलों से उतरे प्रत्याशियों में बैजनाथ पासवान को छोड़ सभी प्रत्याशी गैर विधान सभा क्षेत्र के हैं।
2012 के विधान सभा चुनाव में बैजनाथ पासवान यहां से विधायक चुने गए। जो इसी विधान सभा क्षेत्र के रहने वाले हैं। इस बार भी वह चुनाव मैदान में हैं। उनके साथ दो पूर्व मंत्री चुनाव मैदान में ताल ठोक रहे हैं। भाजपा प्रत्याशी श्रीराम सोनकर और बसपा प्रत्याशी राजेंद्र कुमार पूर्व मंत्री रह चुुके हैं। इस बार के चुनाव में खास बात यह है कि तीनों प्रमुख दलों के प्रत्याशियों को जनता दो-दो बार विधायक बना चुकी है। मौजूदा चुनाव में यदि तीनों में से कोई विधायक चुना जाता है, तो इस जीत के साथ ही वह इस क्षेत्र से आजादी के बाद तीन बार चुने जाने वाला पहला जनप्रतिनिधि होगा।
एक नजर क्षेत्र के विकास पर डालें तो क्षेत्र उद्योगविहीन है। टौंस नदी पर सरया बंदीघाट गांव के पास पुल बनाने की मांग सालों से की जा रही है, लेकिन अभी तक इस पर अमल नहीं हुआ है।
मुहम्मदाबाद गोहना तहसील मुख्यालय सहित आसपास के गांव अतरारी, खैराबाद और वलीदपुर नगर पंचायत बुनकर बाहुल्य है। बुनकरों के साड़ी बुनाई कारोबार में आने वाली बिजली कटौती की समस्या काफी हद तक कम हुई है। इसके अलावा क्षेत्र में कई प्रमुख सड़कों पर भी काम हुआ है। लेकिन दर्जनों गांवों को जोड़ने वाली कई सड़कें खस्ताहाल हैं। क्षेत्र में पेयजल की समस्या का निदान नहीं हो सका