रेलवे स्टेशन स्थित काली मंदिर मेें चल रही रामकथा में पं. विनोद मिश्र ने कहा कि विनम्रता के बिना ज्ञान समर्पण के बिना तपस्या तथा नीति के बिना राजधर्म प्रभावकारी नहीं होता। शक्तियां अर्जित होने पर मनुष्य को सरलता का भाव नहीं त्यागना चाहिए, नहीं तो उसे शक्तिहीन होते देर नहीं लगती।
कहा कि भगवान का संकीर्तन करने से प्राणियों के सभी पाप धुल जाते हैं। बताया कि ‘इस महफिल में हे प्राणी प्रीत लगा के तो देखो, सुख ही सुख है इस जीवन में इसको पाकर तो देखो, बन जाएंगे बिगड़े काम श्रीराम जै राम जै जै राम’ लेकिन विचार करो सचाई पर विधि का एक नियम होता है क्या विधि का विधान रहा जिसे आना पड़ा उसे जाना पड़ेगा।
रावण के वरदान प्राप्त करने के समय कुंभकर्ण, विभीषण ने क्या मांगा। यह सब विधि का ही विधान है। उदाहरण देते हुए कहा कि एक संत एक व्यक्ति को दो ताबीज दिया। एक बाएं हाथ में तो दूसरे को दाएं हाथ में धारण करने का कहा। संकट की घड़ी में दाहिने ताबीज को खोलकर पढ़ लेना। उसमें लिखा था बीत जाएगा।
तात्पर्य रात का अंतिम पहर यह सिद्ध करता है कि कल सवेरा होने वाला है। बताया कि राजा दशरथ आइनें में देखते हैं कि चौथापन आ गया अब राम का राज्याभिषेक की खबर का समाचार सुन राज्य में खुशी की लहर दौड़ गई। राम को माता कैकेयी के कहने पर वन जाना पड़ा।
भगवान राम माता कौशिल्या से मिलकर समाचार सुनाते हैं। मां पिताजी मुझे वन जाने के लिए आदेश दिया है। मां ने कहा कि वह पुत्र बड़ा भाग्यशाली है जो अपने पिता के वचनों का आदर करे। प्रवचन के पूर्व रागिनी, दिव्या, अंजू गुप्ता ने भजन प्रस्तुत कर लोगों को भावविह्वल कर दिया।