मधुबन-बरहज मार्ग पर घाघरा नदी पर बना पीपे का पुल।
लंबे इंतजार के बाद घाघरा नदी पर पीपे का पुल से आवागमन शुरू हो गया है। इससे मऊ, देवरिया सहित कई जिलों की यात्रा आसान हो गई है। हालांकि इस पुल को नवंबर माह में ही चालू हो जाना चाहिए था। फिलहाल पुल चालू हो जाने से लोगों में हर्ष का माहौल है।
मधुबन के उत्तरी छोर पर घाघरा नदी बहती है। नदी के उस तरफ जनपद देवरिया की बरहज तहसील स्थित है। बरहज के रास्ते देवरिया, कुशीनगर, गोरखपुर, रुद्रपुर, महराजगंज सहित तमाम जिलों के सैकड़ों गांव इस रास्ते से जुड़ते हैं। मधुबन क्षेत्र के सैकड़ों रिश्तेदारियां इन जिलों में पड़ती है। जिससे लोगों का प्राय: आवागमन होता है। घाघरा पर पुल नहीं होने से लोगों को बड़हलगंज या गोरखपुर होकर अपने गंतव्य तक जाना पड़ता था। जिसमे समय तथा धन दोनों का नुकसान होता था। घाघरा नदी पर पुल बनाने की मांग कई दशकों से चल रही थी।
दो वर्ष पहले सपा के कद्दावर नेता मोहन सिंह के निधन में शामिल होने आए सपा मुखिया मुलायम सिंह ने मोहन सिंह की स्मृति में पुल बनवाने की बात की थी। जिसे मुलायम सिंह ने स्वीकृति प्रदान कर दियारा और इस क्षेत्र के लोगों के लिए बड़ी राहत दी थी। पुल का काम शुरू भी हुआ लेकिन धीमी गति से चल रहा है। अभी वर्तमान में दियारा क्षेत्र के लोगों को बरहज की बाजार करने के लिए नदी को पार करना पड़ता है, जिसकेे लिए नाव ही मुख्य सहारा है। नदी में पुल नहीं बनने की स्थिति में पिछले कई सालों से नवंबर के महीने में पीपे का पुल लग जाता था, लेकिन संबंधित अधिकारियों की लापरवाही के चलते आज तक लग नहीं सका था। अब पीपे का पुल बन जाने से जो दूरी और समय लोग दिन भर में तय करते थे अब वह दूरी आधे समय में तय कर लेंगे और धन की भी बचत होगी।