मऊ। तहसील घोसी में सिविल जज जूनियर डिविजन की कोर्ट की स्थापना का प्रस्ताव को वापस लेने तथा मधुबन में शुरू हुए ग्राम न्यायालय को बंद कराने की मांग को लेकर सिविल कोर्ट सेंट्रल बार एसोसिएशन के अधिवक्ता बुधवार को न्यायिक कार्य से विरत रहे। साथ ही मुख्य न्यायाधीश उच्च न्यायालय इलाहाबाद और प्रदेश सरकार को पत्र भेजकर उक्त दोनों मांगों को पूरी करने की मांग की गई। अधिवक्ताओं के न्यायिक कार्य से विरत रहने के चलते वादकारियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
बार के अध्यक्ष राजेंद्र राय ने कहा कि जब तक प्रदेश सरकार और उच्च न्यायालय तहसील घोसी में सिविल जज जूनियर डिविजन के कोर्ट की स्थापना के प्रस्ताव को वापस नहीं लेती है। मधुबन में शुरू हुए ग्राम न्यायालय को बंद नहीं कराती है। तब तक जिले के अधिवक्ता प्रत्येक बुधवार को पूरे दिन न्यायिक कार्य से विरत रहकर हाथ में काली पट्टी बांधकर अपना विरोध प्रदर्शन करेंगे। वहीं बार के महामंत्री अरविंद तिवारी ने बताया कि इस संबंध में मुख्य न्यायमूर्ति उच्च न्यायालय इलाहाबाद से को पत्र भेजकर उनसे मिलने के लिए समय की मांग की गई है। समय मिलते ही एक प्रतिनिधिमंडल मुख्य न्यायमूर्ति से मिलकर अपनी बातें रखेगा। साथ ही प्रदेश सरकार से भी मांग किया कि हमारी मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार कर घोसी में सिविल जज जूनियर डिवीजन की कोर्ट के स्थापना का प्रस्ताव वापस लिया जाय। और ग्राम न्यायालय को बंद किया जाए।